हिंदी पत्रिका 'प्रतिज्ञान' का दूसरा अंक अब अमेज़न पर उपलब्ध! इस अंक में ७ कहानियाँ (गोश्त, अग्निपरीक्षा, किराए का कमरा सहित), ७ कविताएँ, उपन्यास समीक्षा और 'वेद सार शिवस्तव स्तोत्र' का हिंदी अनुवाद पढ़ें। अभी खरीदें और पढ़ें।
ब्लॉग
झुर्रियों में सिमटा जीवन – एक बुज़ुर्ग चेहरे पर ५ कविताएँ और १ कहानी
एक तस्वीर, ६ रचनाएँ। उस गरीब बूढ़े की आँखों में झाँकिए जिसके संघर्ष और अकेलेपन को ५ कवियों और १ कहानीकार ने अपनी मार्मिक कलम से आवाज़ दी है। हृदयस्पर्शी रचनाओं का संग्रह।
श्वेता सुखेजा: जीवन के अनुभवों को शब्दों में पिरोती एक कवयित्री
श्वेता सुखेजा की चार कविताएँ – किरदार, जीवन, ज़िन्दगी का रहस्य, और बचपन। जानिए उनकी लेखनी से उनके जीवन के गहरे अनुभव और विचार।
टूटने की कगार पे था – हिंदी कहानी प्रॉम्प्ट
वह टूटा नहीं था। टूटने की कगार पर था। बस इंतज़ार था की कोई काँधे पर अपना हाथ रख दे। फिर वो खुद को रोक न पाता। पढ़ें इस हिंदी कहानी प्रॉम्प्ट पर लिखी कहानियाँ।
हिंदी पत्रिका ‘प्रतिज्ञान’ का अनावरण
हमारी हिंदी पत्रिका ‘प्रतिज्ञान’ एक प्रयास है हिंदी साहित्य की नयी आवाज़ों को पाठकों तक ले जाने का। हिंदी साहित्य की नयी प्रतिभाओं को सम्मान और पहचान दिलाने की ये हमारी मुहीम है।
दो शब्द – शहर और ज़िन्दगी | हिंदी पोएट्री प्रॉम्ट
पढ़िए शहर की ज़िन्दगी पर कुछ दिग्गज शायरों के साथ नए रचनाकारों की कवितायेँ और ख़याल। हमारी हिंदी पोएट्री प्रॉम्प्ट की श्रृंखला की ये दूसरी पेशकश है।
नई कलम – रेखा कुंडू | हिंदी कवयित्री
उभरती प्रतिभाओं की हमारी पहली श्रृंखला में मिलिए कवयित्री रेखा कुंडू से। इस पोस्ट में पढ़िए उनकी दो भावपूर्ण कविताएं - "जब बात बने" और "अधूरी कोशिश" - और उनकी गहरी साहित्यिक समझ को जानिए। हम हिंदी साहित्य की नई प्रतिभाओं को पहचान दिलाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
खामोश चीख – हमारा पहला हिंदी पोएट्री प्रॉम्ट | काव्य प्रेरणा
इस सितम्बर महीने की पहली तारीख को हमने एक नयी पहल की - हमारे इंस्टाग्राम प्रोफाइल पर हमने हमारा पहला हिंदी पोएट्री प्रॉम्प्ट साझा किया। पढ़िए इस प्रॉम्प्ट पर लिखी चुनिंदा कवितायेँ।
अटल जी की कवितायें – हार नहीं मानूँगा
अटल जी की कवितायें मैं आज भी जब भी पढ़ता हूँ, सुनता हूँ या सुनाता हूँ, एक आत्मविश्वास जागृत हो जाता है। खुद पर भरोसा कायम हो जाता है। अटल जी की कविता ढाढस बंधा देती है, मार्गदर्शन करती है।
हरिवंश राय बच्चन की मधुबाला क्या कहती है | एक समीक्षा
क्या कहती है मधुबाला? हरिवंश राय बच्चन जी के गीत काव्य मधुबाला की समीक्षा प्रस्तुत कर रहा हूँ। अकी पने आप को धन्य समझता हूँ कि मैं इतनी महत्वपूर्ण काव्य रचना की समीक्षा अपने पाठकों के सामने प्रस्तुत कर पा रहा हूँ।