हिंदी पत्रिका ‘प्रतिज्ञान’ का दूसरा अंक अब अमेज़न पर उपलब्ध! इस अंक में ७ कहानियाँ (गोश्त, अग्निपरीक्षा, किराए का कमरा सहित), ७ कविताएँ, उपन्यास समीक्षा और ‘वेद सार शिवस्तव स्तोत्र’ का हिंदी अनुवाद पढ़ें। अभी खरीदें और पढ़ें।

प्रतिज्ञान का दूसरा अंक आ गया है!

पहले अंक को आपने जो प्यार और समर्थन दिया, उसके लिए हम आपके आभारी हैं। आपकी प्रेरणा से, हम गर्व के साथ हिंदी पत्रिका ‘प्रतिज्ञान’ का दूसरा अंक प्रस्तुत कर रहे हैं, जो अब अमेज़न पर ईबुक के प्रारूप में उपलब्ध है।

इस अंक की थीम है, वो शाश्वत द्वन्द्व जो हर रचनात्मक मन में चलता रहता है: ‘अधेड़ मन’ का डर और ‘बाल मन’ का अदम्य साहस

हमने आपके लिए चुनी हैं ऐसी साहित्यिक रचनाएँ जो आपको जीवन के नए आयामों पर सोचने को मजबूर करेंगी:

  • ७ रोचक कहानियाँ: इस अंक में आपको पढ़ने को मिलेंगी ‘गोश्त’, ‘अग्निपरीक्षा’, ‘किराए का कमरा’ जैसी ७ ज़ोरदार कहानियाँ, जो मनुष्य की जटिल भावनाओं और सामाजिक यथार्थ को दर्शाती हैं।
  • ७ मर्मस्पर्शी कविताएँ: जीवन की जटिलताओं को बड़ी सरलता से पेश करतीं ७ कविताएँ, जो आपके हृदय को छू लेंगी।
  • गहन उपन्यास समीक्षा: प्रसिद्ध उपन्यास ‘दीवार में एक खिड़की रहती थी’ की विस्तृत समीक्षा।
  • विशेष पेशकश: आध्यात्मिक शांति के लिए, इस अंक में ‘वेद सार शिवस्तव स्तोत्र’ का भावपूर्ण हिंदी अनुवाद विशेष रूप से शामिल किया गया है।

प्रतिज्ञान का लक्ष्य है ऐसी हिंदी सामग्री प्रकाशित करना, जो विचारोत्तेजक और मनोरंजन से भरपूर हो। यह दूसरा अंक उसी संकल्प की ओर एक और कदम है।

आप प्रतिज्ञान के दूसरे अंक को अमेज़न पर यहां खरीद सकते हैं।

आज ही प्रतिज्ञान का दूसरा अंक पढ़ें और साहित्य के इस नए सफर का हिस्सा बनें!

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