जीवन, विचार, रिश्ते और समय, इन सबके बीच 'अंत' की प्रासंगिकता क्या है, इसी दार्शनिक और यथार्थवादी मंथन को समर्पित है यह विशेषांक। इस अंक में पढ़िए देश के विभिन्न कोने से आए रचनाकारों की चुनिंदा कविताएँ, कहानियाँ और वैचारिक आलेख।
प्रतिज्ञान अंक १३ | किरदार : नायक, खलनायक और कल्पना का रंगमंच
पढ़िए 'प्रतिज्ञान' का तेरहवां अंक, अब एक नए और आकर्षक फ्लिप-बुक (Flipbook) अवतार में! इस अंक में समकालीन हिंदी साहित्यकारों की कहानियाँ, कविताएँ, पत्र और लेख शामिल हैं, जो नैपथ्य में छिपे नायकों, खलनायकों और अनूठी कल्पनाओं को उजागर करते हैं। सभी पाठकों के लिए पूर्णतः निःशुल्क।
शब्द-शिल्पी – हिंदी कहानी लेखन प्रतियोगिता
इंतज़ार खत्म हुआ! 'शब्द-शिल्पी' के लिए हमें कुल ४७ आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से हमने १४ सर्वश्रेष्ठ लघु कथाओं का चयन किया है। 'शब्द-शिल्पी' के प्रथम संस्करण को एक बड़ी सफलता बनाने के लिए हम सभी लेखकों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करते हैं।
‘प्रतिज्ञान’ का तीसरा अंक प्रकाशित: जब ‘जात’ बन जाती है सबसे बड़ी चुनौती!
हिंदी पत्रिका 'प्रतिज्ञान' के तीसरे अंक में पढ़िए 'अग्नि परीक्षा' का अगला भाग 'जात', जहाँ पत्रकार शालिनी लड़ रही है सत्ता से। साथ ही अन्य कवितायेँ, कहानियाँ, शायरी और बहुत कुछ।
अस्सी सावन – हिंदी ईबुक | कहानी और कविता संग्रह
हमने दिया था प्रॉम्प्ट - एक बुज़ुर्ग महिला का घूरता चेहरा। इस एक चेहरे पर पढ़िए ६ रचनायें - ३ कहानियाँ और ३ कवितायेँ। अभी डाउनलोड करें हिंदी ईबुक ‘अस्सी सावन’।
एक चेहरा, अनंत कहानियाँ: ‘प्रतिज्ञान’ का नया हिंदी लेखन आह्वान!
हिंदी लेखन प्रतियोगिता! 'प्रतिज्ञान' का नया आह्वान: एक बूढ़े चेहरे से प्रेरित होकर ४००+ शब्दों की कहानी या १०-२० पंक्तियों की कविता लिखें। अपनी रचना ११ नवंबर २०२५ तक भेजें और ई-बुक में प्रकाशित हों!
हिंदी पत्रिका ‘प्रतिज्ञान’ का दूसरा अंक जारी
हिंदी पत्रिका 'प्रतिज्ञान' का दूसरा अंक अब अमेज़न पर उपलब्ध! इस अंक में ७ कहानियाँ (गोश्त, अग्निपरीक्षा, किराए का कमरा सहित), ७ कविताएँ, उपन्यास समीक्षा और 'वेद सार शिवस्तव स्तोत्र' का हिंदी अनुवाद पढ़ें। अभी खरीदें और पढ़ें।
टूटने की कगार पे था – हिंदी कहानी प्रॉम्प्ट
वह टूटा नहीं था। टूटने की कगार पर था। बस इंतज़ार था की कोई काँधे पर अपना हाथ रख दे। फिर वो खुद को रोक न पाता। पढ़ें इस हिंदी कहानी प्रॉम्प्ट पर लिखी कहानियाँ।
हिंदी पत्रिका ‘प्रतिज्ञान’ का अनावरण
हमारी हिंदी पत्रिका ‘प्रतिज्ञान’ एक प्रयास है हिंदी साहित्य की नयी आवाज़ों को पाठकों तक ले जाने का। हिंदी साहित्य की नयी प्रतिभाओं को सम्मान और पहचान दिलाने की ये हमारी मुहीम है।