प्रतिज्ञान प्रकाशन
समकालीन हिंदी रचनाकारों को एक मंच, सम्मान और पहचान दिलाने का हमारा प्रयास है प्रतिज्ञान। हमारी वेबसाइट, मासिक हिंदी पत्रिका और किताबें – पढ़िए और हमसे जुड़िये।
हमारी मासिक हिंदी पत्रिका के सभी अंक ईबुक के स्वरुप में अमेज़न पर उपलब्ध हैं। हमने नए रचनाकारों की कहानियों, कविताओं, शायरी और लेख का बेहतरीन संग्रह प्रस्तुत किया है। अभी पढ़ें और अपने विचार और सुझाव हमसे साझा करें।
शब्द-शिल्पी : प्रथम संस्करण की चुनिंदा कहानियाँ

‘शब्द-शिल्पी‘ के पहले सीज़न में देश भर के उदीयमान रचनाकारों ने अपनी कल्पना के अनूठे रंग भरे हैं। हमारे तीन विशेष प्रॉम्प्ट्स पर आधारित ये १४ चुनिंदा कहानियाँ केवल किस्से नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं, थ्रिल और तीखे व्यंग्य का एक जीवंत दस्तावेज़ हैं। इन बेहतरीन कथाओं को फ्लिप-बुक फॉर्मेट में पढ़ने और समकालीन हिंदी साहित्य की इस नई लहर का अनुभव करने के लिए नीचे क्लिक करें।
अनकही – डिजिटल काव्य संग्रह


पन्नों पर कभी बिखरे, कभी अव्यवस्थित, तो कभी करीने से सजाए हुए ये स्याह अक्षर… कभी-कभी इन मौन अक्षरों का सामूहिक शोर भीतर तक झकझोर देता है।
यह संग्रह उन बातों, उन ख्यालों और उन सवालों का पुल है जो कभी कहे नहीं गए, और यदि कहे गए तो किसी ने उन्हें सुना नहीं। इस अनकही-अनसुनी के बीच न जाने कितनी ज़िंदगियाँ, कितने रिश्ते और कितने लोग अपनी सिसकियों, अपने ठहाकों और अपने एहसासों को भीतर ही दफ़्न करते चले जाते हैं।
‘अनकही’ से ‘कही’ की इस यात्रा में हमारे सहयात्री बनिए।
साहित्य का वार्षिक उत्सव: ‘प्रतिज्ञान’ अब पेपरबैक में!

अमेज़न किंडल पर अपनी डिजिटल सफलता के बाद, ‘प्रतिज्ञान’ अब आपके हाथों में सहेजने के लिए तैयार है। यह विशेष वार्षिक संचयन बीते वर्ष की सर्वश्रेष्ठ कहानियों, कविताओं और केवल इस संस्करण के लिए लिखी गई विशेष नवीन रचनाओं का एक अनूठा संग्रह है।
सामाजिक विमर्श से लेकर प्रेम और दर्शन तक, साहित्य के हर रंग को खुद में समेटे यह पुस्तक हर पाठक के लिए एक अनमोल उपहार है।
अपनी साहित्यिक यात्रा शुरू करें।
मैं – सूक्ष्म, प्यासा, मुखौटा (काव्य-संग्रह)


न जाने कितने ही मनुष्य रावण के दस सिरों से ज़्यादा अहंकार अपने एक सिर में लिए घूम रहे हैं। शायद ऐसे ही किसी एक अहंकारी के दम्भ ने इस संग्रह की सोच को जन्म दिया। प्रस्तुत है भारत के भिन्न-भिन्न शहरों से उन्नीस कवियों और कवयित्रियों का एक सामूहिक जवाब और साझा संकलन: ‘मैं – सूक्ष्म, प्यासा, मुखौटा’। निःशुल्क डिलीवरी के लिए अभी प्री-आर्डर करें।
प्रतिज्ञान के सितारे – पुस्तक विमोचन कार्यक्रम

शनिवार, १० जनवरी २०२६ को नवी मुंबई के ‘टर्न-अ-पेज’ पुस्तकालय में प्रतिज्ञान प्रकाशन के प्रथम काव्य-संग्रह ‘मैं – सूक्ष्म, प्यासा, मुखौटा’ का भव्य विमोचन हुआ। समारोह के मुख्य अतिथि मुंबई और नवी मुंबई में बसे इस संग्रह के रचनाकार स्वयं थे। यह संकलन भारत के विभिन्न शहरों से ताल्लुक रखने वाले उन्नीस कवियों और कवयित्रियों का एक अनूठा साझा प्रयास है। इस गहन विषय पर उनके अनकहे ख़याल और गहरे सवाल पढ़ने के लिए आज ही अपनी प्रति मंगवाएं।
हमारे सभी रचनाकारों की जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें।
शब्द-शिल्पी – हिंदी कहानी लेखन प्रतियोगिता
इंतज़ार खत्म हुआ! ‘शब्द-शिल्पी’ के लिए हमें कुल ४७ आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से हमने १४ सर्वश्रेष्ठ लघु कथाओं का चयन किया है। ‘शब्द-शिल्पी’ के प्रथम संस्करण को एक बड़ी सफलता बनाने के लिए हम सभी लेखकों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करते हैं।
मुखौटा – मजबूरी, फितरत या साजिश | हिंदी कविता प्रॉम्प्ट
कभी मजबूरी, कभी फितरत और कभी साजिश। इंसान कई चेहरे लगाता है। हमने ‘प्रतिज्ञान’ परिवार के सदस्यों से आग्रह किया की ‘मुखौटा’ शब्द पर अपने ख़याल लिख कर भेजें। अभी पढ़ें।
‘प्रतिज्ञान’ का तीसरा अंक प्रकाशित: जब ‘जात’ बन जाती है सबसे बड़ी चुनौती!
हिंदी पत्रिका ‘प्रतिज्ञान’ के तीसरे अंक में पढ़िए ‘अग्नि परीक्षा’ का अगला भाग ‘जात’, जहाँ पत्रकार शालिनी लड़ रही है सत्ता से। साथ ही अन्य कवितायेँ, कहानियाँ, शायरी और बहुत कुछ।
क्या आप प्रतिज्ञान के ‘काव्य-नक्षत्र’ के अगले सितारे हैं?
अगर आपकी कविताओं में जज़्बात हैं और शब्दों में जान, तो हम आपको तलाश रहे हैं। हम आमंत्रित करते हैं उन सभी रचनाकारों को जो अपनी कला को एक बड़ा मंच देना चाहते हैं।
प्रतिज्ञान का नया साप्ताहिक स्तंभ ‘काव्य नक्षत्र’ उन उभरते कवियों और कवयित्रियों को समर्पित है जो अपनी लेखनी से समकालीन साहित्य में एक नई ऊर्जा भर रहे हैं।
आइए, साथ मिलकर हिंदी साहित्य के इस कारवां को आगे बढ़ाएँ। आपकी कलम, हमारा मंच!