न जाने कितने ही मनुष्य रावण के दस सिरों से ज़्यादा अहंकार अपने एक सिर में लिए घूम रहे हैं। शायद ऐसे ही किसी एक अहंकारी के दम्भ ने इस संग्रह की सोच को जन्म दिया। प्रस्तुत है भारत के भिन्न-भिन्न शहरों से उन्नीस कवियों और कवयित्रियों का एक सामूहिक जवाब और साझा संकलन: ‘मैं – सूक्ष्म, प्यासा, मुखौटा’।


पेपरबैक प्रति ऑर्डर करें (मूल्य – Rs. 140)
रचनाकारों का परिचय
- सम्पादक : नितेश वर्मा
- सह सम्पादक : शिव कुमार शर्मा
- मुखपृष्ठ डिज़ाइन : सारंग भांड
अनीता क्वात्रा
अनीता क्वात्रा, एक संवेदनशील रचनाकार, जीवन की कोमल भावनाओं को शब्दों में ढालने का अद्भुत हुनर रखती हैं। पंजाब के पटियाला में जन्मीं अनीता बचपन से ही भाषा, संस्कृति और मानवीय संवेदनाओं की गहराई से जुड़ी रही हैं। विवाह के बाद उन्होंने हरियाणा को अपना घर बनाया, जहाँ वे अपने पंजाब की मिट्टी, बोलियों और परंपराओं को दिल में सहेजे हुए, बच्चों को पंजाबी भाषा सिखाने का निष्ठापूर्ण कार्य भी करती हैं। उनकी शिक्षा भले ही ग्रेजुएशन तक सीमित हो, पर उनकी वास्तविक विद्या उनके अनुभवों, संवेदनाओं और जीवन के उतार–चढ़ाव में निहित है। इसीलिए उनकी रचनाओं में चकाचौंध नहीं बल्कि सच्चाई, आत्मीयता और स्त्री-मन की गहराई से जन्मा एक मार्मिक यथार्थ मिलता है।
अंकित राज ओझा
छपरा (बिहार) में जन्मे व सॉफ्टवेयर अभियंता रहे अंकित राज ओझा आईआईटी रूड़की से पीएचडी हैं एवं उच्चतर शिक्षा विभाग, हरियाणा में अंग्रेज़ी के सहायक प्राध्यापक हैं। अंकित की रचनायें बीस देशों में प्रकाशित हैं जिनमें पोएट्री वेल्स, रटलेज, जॉन्स हॉप्किंस यूनिवर्सिटी प्रैस, साहित्य अकादमी, चंद्रभागा, आउटलुक आदि पत्रिकाएँ व प्रकाशन हैं। आपकी तीन किताबें हैं व आप “द हुगली रिव्यु” पत्रिका के सम्पादक हैं।
बीरेंद्र यादव ‘सागर’
बीरेंद्र जीवन के छोटे किन्तु महत्वपूर्ण पहलुओं पर सरल और सहज भाषा में अपने विचार व्यक्त करते हैं। उनके लेखन में कविताओं और शायरी का एक खूबसूरत संगम देखने को मिलता है, जिसके कारण उनके विचार पाठकों तक आसानी से पहुँचते हैं। उनके दो काव्य संग्रह, ‘ख्वाहिश दिल की’ और ‘एक ख़्वाब चाहतों का’, प्रमुख ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म (जैसे अमेज़न और फ्लिपकार्ट) पर पाठकों के लिए उपलब्ध हैं।
कनक अग्रवाल
कनक एक गृहिणी हैं जो आगरा में निवास करती हैं। वह अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ, जीवन की जटिलताओं को शब्दों के माध्यम से सुलझाने का प्रयास करती हैं। उनका मानना है कि मानव जीवन में प्रेम सर्वोपरि है और यही वह माध्यम है जो सभी विषमताओं और वैमनस्यताओं को समाप्त करने की शक्ति रखता है। इसी कारण, प्रेम उनका पसंदीदा विषय है, जिसे वह अपनी कविताओं के माध्यम से व्यक्त करने का प्रयास करती हैं। वह चाहती हैं कि संसार के सारे विभेद समाप्त हो जाएँ और पूरा संसार प्रेममय हो जाए।
कावेरी झा
लखनऊ की २७ वर्षीया गृहिणी कावेरी अपने परिवार, किताबों और बागवानी के शौक के साथ एक शांत जीवन जीती हैं। सुबह की चाय के साथ बालकनी में बैठकर कहानियाँ गढ़ना और मानवीय रिश्तों की बारीक परतों को समझना उन्हें पसंद है। उनकी रचनाओं में रोज़मर्रा के जीवन की सादगी और भावनाओं की गहराई देखने को मिलती है। कावेरी का मानना है कि हर व्यक्ति के जीवन में एक अनकही कहानी होती है, जिसे शब्दों का रूप देना उन्हें सुकून देता है। उनकी लेखनी आपको ऐसी ही छोटी-छोटी, पर दिल को छू लेने वाली कहानियों के संसार में ले जाएगी।
कुमुद बंसल
कुमुद को बचपन से ही कविता लिखने का शौक रहा है। वह अक्सर अपने पिता के साथ कवि-सम्मेलनों में जाती थीं, जहाँ विभिन्न कवियों की रचनाएँ सुनना उन्हें अत्यंत प्रिय था। बचपन में कवि-सम्मेलनों से मिली इसी प्रेरणा ने उनकी कविताओं को एक विशिष्ट दिशा दी। उनका स्वभाव सरल है, उन्हें सादगी प्रिय है, और वह प्रकृति के बेहद करीब हैं। एक आईटी प्रोफेशनल होने के नाते, जहाँ वह कोडिंग की तार्किक दुनिया में दक्ष हैं, वहीं वह कविता के माध्यम से अपनी भावनाओं को सादगी और सौंदर्य के साथ सहजता से अभिव्यक्त करना भी बखूबी जानती हैं।
नमो नारायण दीक्षित
कानपुर, उत्तर प्रदेश में जन्मे नमो नारायण दीक्षित युवा रचनाकार हैं, जिन्होंने हिंदी साहित्य में मास्टर डिग्री प्राप्त की है। वे कविता, कहानी और निबंध के माध्यम से मानवीय रिश्तों की संवेदनशीलता और जीवन के यथार्थवादी संघर्षों को अपनी कलम से बड़ी बारीकी से पिरोते हैं।
नितेश मोहन वर्मा
प्रतिज्ञान प्रकाशन के संस्थापक और प्रधान सम्पादक के तौर पर, आप हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों भाषाओं में कहानियाँ और कविताएँ लिखते हैं। आपका पहला काव्य संग्रह, ‘I Hear The Dead’, जंग की त्रासदी पर इक्कीस कविताओं के माध्यम से एक मार्मिक कहानी बुनता है। समकालीन हिंदी साहित्य के रचनाकारों को एक मंच और सम्मान दिलाना आपका प्रमुख संकल्प है।
पिंकी गिरी
पिंकी जी साहित्य और कला के प्रति गहरा अनुराग रखने वाली एक समर्पित लेखिका हैं, जो गृहणी के रूप में अपने दायित्वों के साथ-साथ रचनात्मकता के संसार में सक्रिय हैं। दिल्ली में जन्मीं और स्नातक की शिक्षा प्राप्त करने वाली पिंकी, वर्तमान में उत्तराखंड के नैनीताल जिले की शांत और प्राकृतिक वादियों में रहती हैं। उनका लेखन, जीवन के सूक्ष्म अनुभवों और साहित्यिक संवेदनाओं का एक सुंदर समन्वय है। पठन और लेखन के प्रति उनका गहन शौक उन्हें कला और साहित्य की दुनिया से जोड़ता है। उनकी विचारशील और आत्मीय रचनाएँ देश के कई प्रतिष्ठित किताबों और समाचार पत्रों में सफलतापूर्वक प्रकाशित हो चुकी हैं।
पूजा शुक्ला
झांसी, उत्तर प्रदेश में पली बढ़ी पूजा शुक्ला पेशे से एक बैंकर हैं जो मुंबई में कार्यरत हैं, और निजी जिंदगी में वो एक शांत और अंतर्मुखी स्वभाव रखती हैं, जो बोलती कम हैं और महसूस ज्यादा कर पाती हैं। ज़िंदगी में आए कुछ निजी हादसों ने उसका रुख कविताओं की तरफ मोड़ दिया। दर्द ने जब उसे घेरा, तो उसने दुनिया से नहीं, बल्कि लफ़्ज़ों से दोस्ती कर ली। वो ज़्यादातर तन्हाई, खालीपन, उदासी, और टूटे दिलों पर लिखती है। उसे लगता है कि इन भावों पर लोग कम बात करते हैं, और इन पर ज्यादा बात होनी चाहिए।
प्रकृति करगेती
२०१५ में ‘ठहरे हुए से लोग’ कहानी के लिए राजेंद्र यादव हंस कथा सम्मान मिला। पहला कहानी संग्रह ‘ठहरे हुए से लोग’ (हिन्दयुग्म, २०२२) प्रकाशित। यह संग्रह ‘साहित्य अकादेमी युवा पुरस्कार’ तथा ‘जानकी पुल शशिभूषण द्विवेदी सम्मान’ के लिए भी नामांकित हुआ। दो कविता संग्रह ‘शहर और शिकायतें’ (राधाकृष्ण प्रकाशन, २०१७) और ‘दो ध्रुवों के बीच’ (सेतु प्रकाशन, २०२२) प्रकाशित। २०१५ में बीबीसी की 100 वीमेन सूची में शामिल हुईं। रज़ा फ़ॉउंडेशन द्वारा आयोजित युवा २०१६ और युवा २०१८ में एक वक्ता के रूप में शिरकत। हंस, हिंदवी, वनमाली, ज्ञानोदय, आलोचना, पाखी, जानकीपुल, लल्लनटॉप में रचनाएं प्रकाशित। इंडिया टुडे, नेटवर्क 18, और बीबीसी में पत्रकार और प्रोड्यूसर की भूमिका में कार्यरत रहीं। टी.वी.एफ़, कल्चर मशीन, टाइम्स इंटरनेट से जुड़कर पटकथा लेखन की ओर रुख किया। वर्तमान में ए.आई. (AI) संस्थान में पटकथा लेखिका के रूप में कार्यरत हैं। स्वतंत्र लेखन जारी है।
पूजा कौशिक
पूजा एक कथाकार और मीडिया पेशेवर हैं, जिनकी रचनात्मक यात्रा रेडियो, पत्रकारिता और शिक्षा के माध्यम से गुज़री है। मास कम्युनिकेशन की प्रष्ठभूमि से आकर, आपने अपने शुरुआती करियर में जनसम्पर्क (PR), सोशल मीडिया मार्केटिंग, और कई सामाजिक विकास परियोजनाओं पर काम किया। आपका पहला बड़ा ब्रेक ऑल इंडिया रेडियो, पटना में आया, जहाँ आप एक कलाकार और कथावाचक के रूप में निखरीं। इसके उपरांत, आपको डिजिटल मार्केटिंग, वेब लेखन और कम्युनिटी लीडरशिप (लेखक समुदाय) के क्षेत्र में आगे सीखने और बढ़ने का अवसर प्राप्त हुआ। पूजा का मानना है कि उनका लेखन रोज़मर्रा के जीवन और गहन अवलोकन पर आधारित है; वह दृढ़ता से मानती हैं कि यदि अनुभवों को शब्दों में ढालने का कौशल है, तो उन्हें व्यक्त करना आवश्यक है। वर्तमान में, वह अपने सभी अनुभवों को एकत्रित कर, अपनी रचनात्मक एजेंसी, ‘क्रिएटिव भर्ता’ (Creative Bhartaa) का सफलतापूवक संचालन कर रही हैं।
सारंग भांड
सारंग क्लीन-टेक सेक्टर में काम करने वाले एक उद्यमी हैं। वे सप्ताहंत में लिखने में समय बिताना पसंद करते हैं। वह जापानी कविता रूपों के एक उत्सुक छात्र हैं और ‘सेनर्यू’ लिखना पसंद करते हैं। वह कभी-कभी निबंध और लघु कथाएँ भी लिखते हैं।
शिव कुमार शर्मा
मुंबई निवासी शिव कुमार शर्मा आधुनिक युग के उन विरल रचनाकारों में से हैं जो अपने आईटी पेशेवर जीवन के साथ-साथ एक संवेदनशील कवि और चिंतक की भूमिका निभाते हैं। वे तकनीक और भारतीय परंपरा के बीच एक सजीव सेतु रचते हैं। शिव की लेखनी में रामचरितमानस, संत कवियों के दोहों और मानव अनुभवों की सूक्ष्म संवेदनाएँ सहजता से मिलती हैं। उनका लक्ष्य है कि शब्दों के माध्यम से वे भी आने वाली पीढ़ी के लिए ज्ञान के अनमोल रतन छोड़ जाएँ, ठीक उसी तरह जैसे हमारे पुराने ऋषियों और कवियों ने किया था। आप प्रतिज्ञान प्रकाशन के सह-सम्पादक हैं।
शिवनाथ सिंह
शिवनाथ आधुनिक हिन्दी वृक्ष की वो नवीन कोपल हैं, जो इस वृक्ष की सघन छांव और कविताओं के आलिंगन में स्वयं को सजीव महसूस करते हैं। इनकी कविताएँ स्मृतियों, टूटन और मन के उथल–पुथल से फूटती हैं। वे भावनाओं को सजाते नहीं, बल्कि उन्हें कच्ची ईमानदारी से शब्दों में उतारते हैं। उनकी कविताएँ सीधे हृदय में उतरती हैं, कभी उदास, कभी बेचैन, लेकिन सदैव गहरी और अविस्मरणीय। वे मन की चुप्पियों और हृदय की कसक को शब्दों के जरिए कविताओं में बांधते हैं। शिवनाथ कविताओं को लिखने से ज्यादा उन्हें जीना पसंद करते हैं।
सोनी रमाकांत
सोनी जी ने ह्यूमैनिटीज़ में पीएचडी की है और इंश्योरेंस और रिस्क मैनेजमेंट में मास्टर्स डिग्री हासिल की है। उन्हें पढ़ने और लिखने का बहुत शौक है। वो आम लोगों की ज़िंदगी और उनसे जुड़ी सच्ची कहानियों पर अपने विचार और कहानियाँ लिखना पसंद करती हैं।
सोनिया डोगरा
सोनिया डोगरा ‘Kuhu Learns to Deal With Life’ नामक मिडिल-ग्रेड रियलिस्टिक फिक्शन की लेखिका हैं। वह एक पूर्व शिक्षिका, फ्रीलांस एडिटर, लेखिका और कवयित्री हैं, जिनकी रचनाएँ व्यापक रूप से प्रकाशित हुई हैं। उनकी महत्त्वपूर्ण कृतियाँ ‘Amity- Peace Poems’, ‘My India My Gods’, ‘Kitaab’, ‘Setu Journal’, ‘Usawa Lit Mag’, ‘The Hooghly Review’, ‘Porch Lit Mag’ और ‘Muse India’ पत्रिकाओं में शामिल हैं। वह अपने यूट्यूब चैनल ‘Poetry Palooza’ पर बच्चों के लिए कविताएँ सुनाना भी पसंद करती हैं। सोनिया 2024 के रमा मेहता राइटिंग ग्रांट की शॉर्टलिस्टी भी हैं।
सनशाइन सुषमा
सुषमा एक नवोदित कवयित्री हैं, जो छंदों (कविता) के माध्यम से जीवन और भावनाओं की जटिलताओं को तलाश रही हैं। शब्दों और कहानियों के प्रति जुनून के साथ, उनका उद्देश्य लेखन के द्वारा पाठकों से जुड़ना है। यह उनका पहला प्रकाशित कार्य है।
स्वप्निल मांडवीकर
स्वप्निल का जन्म जबलपुर, मध्य प्रदेश में हुआ था और वह विगत 13 वर्षों से मुंबई के निवासी हैं। वह एक ऐसे कवि और क्रिएटिव राइटर हैं जो अपने इंजीनियरिंग-कंसल्टिंग करियर के साथ-साथ कविता को अपने दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाए रखते हैं। उनकी मातृभाषा मराठी है और उनकी शिक्षा का माध्यम अंग्रेजी रहा है, लेकिन कविता में भावों को हिंदी में प्रकट करना उनकी एक विशेष पहचान है। हालाँकि, उन्होंने हिंदी और मराठी दोनों ही भाषाओं में सशक्त रूप से अपनी कविताओं में अभिव्यक्ति दी है। रिश्ते, पहचान, भावनाएँ और समाज से प्रेरित विचारों को लेकर विभिन्न विषयों पर कविताएँ रचना उनकी गहरी अभिरुचि है। स्वप्निल की एक विशिष्ट पहचान उनकी पौराणिक कथाओं से प्रेरित आधुनिक कविताएँ हैं, जहाँ वह परंपरागत कथाओं को आज के जीवन की भावनाओं और समकालीन सवालों से जोड़ते हैं। इसी विशेषता के कारण उनकी कविता एक साथ पुरातन और समकालीन दोनों समय से संवाद करती हुई प्रतीत होती है।
इस पुस्तक में व्यक्त विचार लेखकों के अपने हैं। यद्यपि सामग्री का यथासंभव तथ्यात्मक सत्यापन किया गया है, तथापि प्रकाशक किसी भी रूप से इसके लिए उत्तरदायी नहीं है।
इस पुस्तक के सर्वाधिकार सुरक्षित हैं। किसी भी रूप में इसके सम्पूर्ण या किसी अंश के पुनरुत्पादन के लिए प्रकाशक/लेखक की पूर्वानुमति आवश्यक है।
हम सभी भाषाओं और विधाओं में लिखी गई मौलिक रचनाओं का स्वागत करते हैं। अपनी रचनाएं हमारे साथ साझा करें और प्रत्तिज्ञान के व्यापक पाठक वर्ग तक अपनी आवाज़ पहुंचाएं।
समकालीन हिंदी साहित्य के उभरते रचनाकारों को जानने के लिए हमसे इंस्टाग्राम पर जुड़ें और हमारी मासिक हिंदी साहित्यिक पत्रिका ‘प्रतिज्ञान’ पढ़ें।