कभी मजबूरी, कभी फितरत और कभी साजिश। इंसान कई चेहरे लगाता है। हमने ‘प्रतिज्ञान’ परिवार के सदस्यों से आग्रह किया की ‘मुखौटा’ शब्द पर अपने ख़याल लिख कर भेजें। अभी पढ़ें।
ब्लॉग
‘प्रतिज्ञान’ का तीसरा अंक प्रकाशित: जब ‘जात’ बन जाती है सबसे बड़ी चुनौती!
हिंदी पत्रिका 'प्रतिज्ञान' के तीसरे अंक में पढ़िए 'अग्नि परीक्षा' का अगला भाग 'जात', जहाँ पत्रकार शालिनी लड़ रही है सत्ता से। साथ ही अन्य कवितायेँ, कहानियाँ, शायरी और बहुत कुछ।
गणित के प्रोफ़ेसर की शब्द-साधना: डॉ. देवेंद्र कुमार की कवितायें
प्रत्तिज्ञान की "नयी कलम" श्रृंखला में पढ़िए डॉ. देवेंद्र कुमार की तीन मार्मिक कवितायें। उनकी सरल मगर गहरी रचनाएं: 'तुम राजदार थे उसके तुम्हें पता होगा', 'याद रखना यह वचन', और 'समंदर किनारे' - के साथ कवि का विशेष परिचय।
अस्सी सावन – हिंदी ईबुक | कहानी और कविता संग्रह
हमने दिया था प्रॉम्प्ट - एक बुज़ुर्ग महिला का घूरता चेहरा। इस एक चेहरे पर पढ़िए ६ रचनायें - ३ कहानियाँ और ३ कवितायेँ। अभी डाउनलोड करें हिंदी ईबुक ‘अस्सी सावन’।
एक चेहरा, अनंत कहानियाँ: ‘प्रतिज्ञान’ का नया हिंदी लेखन आह्वान!
हिंदी लेखन प्रतियोगिता! 'प्रतिज्ञान' का नया आह्वान: एक बूढ़े चेहरे से प्रेरित होकर ४००+ शब्दों की कहानी या १०-२० पंक्तियों की कविता लिखें। अपनी रचना ११ नवंबर २०२५ तक भेजें और ई-बुक में प्रकाशित हों!
भावुक कविता: ‘दादी की विरासत’ – विभाजन की त्रासदी और नई ज़िंदगी का सफ़र
कवयित्री श्वेता सुखेजा की नई हिंदी कविता 'दादी की विरासत' में पढ़ें देश विभाजन के दौरान उनकी दादी के संघर्ष और साहस की कहानी। अपनी साहित्यिक रचनाएँ हमें भेजें।
हिंदी पत्रिका ‘प्रतिज्ञान’ का दूसरा अंक जारी
हिंदी पत्रिका 'प्रतिज्ञान' का दूसरा अंक अब अमेज़न पर उपलब्ध! इस अंक में ७ कहानियाँ (गोश्त, अग्निपरीक्षा, किराए का कमरा सहित), ७ कविताएँ, उपन्यास समीक्षा और 'वेद सार शिवस्तव स्तोत्र' का हिंदी अनुवाद पढ़ें। अभी खरीदें और पढ़ें।
झुर्रियों में सिमटा जीवन – एक बुज़ुर्ग चेहरे पर ५ कविताएँ और १ कहानी
एक तस्वीर, ६ रचनाएँ। उस गरीब बूढ़े की आँखों में झाँकिए जिसके संघर्ष और अकेलेपन को ५ कवियों और १ कहानीकार ने अपनी मार्मिक कलम से आवाज़ दी है। हृदयस्पर्शी रचनाओं का संग्रह।
श्वेता सुखेजा: जीवन के अनुभवों को शब्दों में पिरोती एक कवयित्री
श्वेता सुखेजा की चार कविताएँ – किरदार, जीवन, ज़िन्दगी का रहस्य, और बचपन। जानिए उनकी लेखनी से उनके जीवन के गहरे अनुभव और विचार।
टूटने की कगार पे था – हिंदी कहानी प्रॉम्प्ट
वह टूटा नहीं था। टूटने की कगार पर था। बस इंतज़ार था की कोई काँधे पर अपना हाथ रख दे। फिर वो खुद को रोक न पाता। पढ़ें इस हिंदी कहानी प्रॉम्प्ट पर लिखी कहानियाँ।