जीवन, विचार, रिश्ते और समय, इन सबके बीच 'अंत' की प्रासंगिकता क्या है, इसी दार्शनिक और यथार्थवादी मंथन को समर्पित है यह विशेषांक। इस अंक में पढ़िए देश के विभिन्न कोने से आए रचनाकारों की चुनिंदा कविताएँ, कहानियाँ और वैचारिक आलेख।
ब्लॉग
‘हर शाख़ पर उल्लू बैठा है’ समीक्षा : थ्रिलर, व्यंग्य और देसी बोली का अद्भुत तालमेल
मुकुल रंजन के उपन्यास 'हर शाख़ पर उल्लू बैठा है' की विस्तृत समीक्षा। जानिए कैसे यह किताब कॉरपोरेट संस्कृति, मीडिया की दुनिया और इंसानी महत्वाकांक्षाओं पर तीखा व मनोरंजक व्यंग्य करती है।
प्रतिज्ञान अंक १३ | किरदार : नायक, खलनायक और कल्पना का रंगमंच
पढ़िए 'प्रतिज्ञान' का तेरहवां अंक, अब एक नए और आकर्षक फ्लिप-बुक (Flipbook) अवतार में! इस अंक में समकालीन हिंदी साहित्यकारों की कहानियाँ, कविताएँ, पत्र और लेख शामिल हैं, जो नैपथ्य में छिपे नायकों, खलनायकों और अनूठी कल्पनाओं को उजागर करते हैं। सभी पाठकों के लिए पूर्णतः निःशुल्क।
शब्द-शिल्पी – हिंदी कहानी लेखन प्रतियोगिता
इंतज़ार खत्म हुआ! 'शब्द-शिल्पी' के लिए हमें कुल ४७ आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से हमने १४ सर्वश्रेष्ठ लघु कथाओं का चयन किया है। 'शब्द-शिल्पी' के प्रथम संस्करण को एक बड़ी सफलता बनाने के लिए हम सभी लेखकों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करते हैं।
मुखौटा – मजबूरी, फितरत या साजिश | हिंदी कविता प्रॉम्प्ट
कभी मजबूरी, कभी फितरत और कभी साजिश। इंसान कई चेहरे लगाता है। हमने ‘प्रतिज्ञान’ परिवार के सदस्यों से आग्रह किया की ‘मुखौटा’ शब्द पर अपने ख़याल लिख कर भेजें। अभी पढ़ें।
‘प्रतिज्ञान’ का तीसरा अंक प्रकाशित: जब ‘जात’ बन जाती है सबसे बड़ी चुनौती!
हिंदी पत्रिका 'प्रतिज्ञान' के तीसरे अंक में पढ़िए 'अग्नि परीक्षा' का अगला भाग 'जात', जहाँ पत्रकार शालिनी लड़ रही है सत्ता से। साथ ही अन्य कवितायेँ, कहानियाँ, शायरी और बहुत कुछ।
गणित के प्रोफ़ेसर की शब्द-साधना: डॉ. देवेंद्र कुमार की कवितायें
प्रत्तिज्ञान की "नयी कलम" श्रृंखला में पढ़िए डॉ. देवेंद्र कुमार की तीन मार्मिक कवितायें। उनकी सरल मगर गहरी रचनाएं: 'तुम राजदार थे उसके तुम्हें पता होगा', 'याद रखना यह वचन', और 'समंदर किनारे' - के साथ कवि का विशेष परिचय।
अस्सी सावन – हिंदी ईबुक | कहानी और कविता संग्रह
हमने दिया था प्रॉम्प्ट - एक बुज़ुर्ग महिला का घूरता चेहरा। इस एक चेहरे पर पढ़िए ६ रचनायें - ३ कहानियाँ और ३ कवितायेँ। अभी डाउनलोड करें हिंदी ईबुक ‘अस्सी सावन’।
एक चेहरा, अनंत कहानियाँ: ‘प्रतिज्ञान’ का नया हिंदी लेखन आह्वान!
हिंदी लेखन प्रतियोगिता! 'प्रतिज्ञान' का नया आह्वान: एक बूढ़े चेहरे से प्रेरित होकर ४००+ शब्दों की कहानी या १०-२० पंक्तियों की कविता लिखें। अपनी रचना ११ नवंबर २०२५ तक भेजें और ई-बुक में प्रकाशित हों!
भावुक कविता: ‘दादी की विरासत’ – विभाजन की त्रासदी और नई ज़िंदगी का सफ़र
कवयित्री श्वेता सुखेजा की नई हिंदी कविता 'दादी की विरासत' में पढ़ें देश विभाजन के दौरान उनकी दादी के संघर्ष और साहस की कहानी। अपनी साहित्यिक रचनाएँ हमें भेजें।