‘प्रतिज्ञान’ परिवार अपनी इस साहित्यिक यात्रा में आपके अपार स्नेह और विश्वास के साथ एक और महत्त्वपूर्ण पड़ाव पर पहुँच चुका है। हमें यह घोषणा करते हुए अपार हर्ष है कि ‘प्रतिज्ञान: संकल्प’ का तीसरा अंक अब प्रकाशित हो चुका है।

पहले और दूसरे अंक को आपने जो अभूतपूर्व समर्थन दिया, उसी ने हमें हर बार और बेहतर करने का संकल्प दिया है। आपके इसी विश्वास के बल पर आग लग चुकी है, और हमारा संकल्प अडिग है।


इस अंक का विशेष आकर्षण: अग्निपरीक्षा का दूसरा भाग: जात

इस अंक में आप पढ़ेंगे हमारे लोकप्रिय धारावाहिक ‘अग्नि परीक्षा’ का अगला, बेहद रोमांचक भाग: ‘जात’

पत्रकार शालिनी ने तमाम संघर्षों के बाद अपने पति अशोक की ज़मानत तो करवा ली है, लेकिन यह जीत सिर्फ एक अस्थायी राहत है। अब उसकी लड़ाई किसी परिवार या रिश्तेदार से नहीं, बल्कि भ्रष्ट राजनेता, निर्दयी पूँजीपति और चालाक रणनीतिकार चारुलता के गठजोड़ से है।

‘जात’ इस बात की पड़ताल करता है कि कैसे सामाजिक पदानुक्रम, वर्ग और सत्ता किसी व्यक्ति के भाग्य को निर्धारित करती है। क्या शालिनी अपने रिश्ते को बचाते हुए, इस सत्ता की ‘जात’ को बेनकाब कर पाएगी?

कला, साहित्य और संस्कृति का संगम

इस अंक में आपको ‘अग्नि परीक्षा’ के साथ-साथ समकालीन हिंदी साहित्य के अनमोल रत्न पढ़ने को मिलेंगे:

  • सोच-विचार को प्रेरित करने वाली लघु कहानियाँ और ज़ोरदार कथाएँ।
  • शक्तिशाली समकालीन कविताएँ और आलोचनात्मक निबंध, जो वर्तमान समाज पर गहरा प्रकाश डालते हैं।

विशेष घोषणा: दिसंबर में आ रही हैं दो ई-बुक्स!

हम अपनी रचनात्मक यात्रा का विस्तार करते हुए, अपने पाठकों के लिए एक बड़ी सौगात लेकर आ रहे हैं। दिसंबर माह में हम दो विशेष ई-बुक्स प्रकाशित करेंगे:

  1. कविता संग्रह – ‘मैं: सूक्ष्म, प्यासा, मुखौटा’: मानवीय भावनाओं के गहरे आयामों को छूने वाली कविताओं का एक अनूठा और विशिष्ट संग्रह।
  2. ‘प्रतिज्ञान: अंक 4’: हमारी पत्रिका श्रृंखला का अगला खंड, जो आपके लिए समय से पहले ई-बुक के रूप में उपलब्ध होगा।

हम इन दोनों नई कृतियों के लिए आपके उत्साहपूर्ण स्वागत की अपेक्षा करते हैं।

‘प्रतिज्ञान: संकल्प’ के तीसरे अंक को अभी पढ़ें और संकल्प और सत्य की लड़ाई में शामिल हों!

‘प्रतिज्ञान’ अंक 3 के विवरण और पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

हम आपके बहुमूल्य सुझावों और प्रतिक्रियाओं का हमेशा स्वागत करते हैं। आप अपनी प्रतिक्रियाएँ और आगामी अंकों के लिए अप्रकाशित रचनाएँ हमें ईमेल पर भेज सकते हैं।

आपके अटूट विश्वास और निरंतर सहयोग के लिए एक बार फिर हृदय से आभार!

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