‘प्रतिज्ञान’ हिंदी साहित्य की वह अविरल धारा है जिसने अपनी डिजिटल उपस्थिति से पाठकों के दिलों में एक विशेष स्थान बनाया है। अमेज़न किंडल पर मासिक ई-पुस्तकों की सफलता के बाद, हम अपने पाठकों के लिए लेकर आए हैं यह विशेष ‘वार्षिक संचयन’ अब पेपरबैक के रूप में।

यह संग्रह केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि बीते एक वर्ष की साहित्यिक यात्रा का सार है। इसमें शामिल हैं :

  • वर्ष की सर्वश्रेष्ठ रचनाएँ : मासिक ई-संस्करणों से चुनी गई वे कहानियाँ और कविताएँ जिन्होंने पाठकों को सबसे अधिक प्रभावित किया।
  • विशेष नवीन सामग्री : कुछ विशेष नई कहानियाँ और कविताएँ जो केवल इसी पेपरबैक संस्करण के लिए लिखी गई हैं।
  • विविध विधाएँ : सामाजिक सरोकार, प्रेम, दर्शन और आधुनिक जीवन के द्वंद्वों को समेटती विविध साहित्यिक विधाओं का अनूठा मिश्रण।

चाहे आप पुराने पाठक हों या साहित्य की दुनिया में नए, ‘प्रतिज्ञान’ का यह वार्षिक अंक आपकी बुकशेल्फ़ की शोभा बढ़ाएगा और आपको शब्दों की एक जादुई दुनिया में ले जाएगा।

साहित्य के इस उत्सव का हिस्सा बनें। अपनी प्रति आज ही ऑर्डर करें!


प्रतिज्ञान : वार्षिक संचयन २०२६ – साहित्य, सृजन और संवेदनाओं का संगम

पेपरबैक प्रति अभी आर्डर करें (मूल्य : Rs. 240)

Name
How many copies do you wish to order?
Delivery
स्वीकृति

रचनाकारों का परिचय

  • सम्पादक : नितेश मोहन वर्मा
  • सह सम्पादक : शिव कुमार शर्मा

छपरा (बिहार) में जन्मे व सॉफ्टवेयर अभियंता रहे अंकित राज ओझा आईआईटी रूड़की से पीएचडी हैं एवं उच्चतर शिक्षा विभाग, हरियाणा में अंग्रेज़ी के सहायक प्राध्यापक हैं। अंकित की रचनायें बीस देशों में प्रकाशित हैं जिनमें पोएट्री वेल्स, रटलेज, जॉन्स हॉप्किंस यूनिवर्सिटी प्रैस, साहित्य अकादमी, चंद्रभागा, आउटलुक आदि पत्रिकाएँ व प्रकाशन हैं। आपकी तीन किताबें हैं व आप “द हुगली रिव्यु” पत्रिका के सम्पादक हैं।

पटना के युवा आसिफ, अपनी कलम से कहानियों में जान भर देते हैं। पेशे से एक अकाउंटेंट, आसिफ दिन भर संख्याओं की दुनिया में खोए रहते हैं, लेकिन शाम होते ही उनका दिल शब्दों की गलियों में निकल पड़ता है। उन्हें फुर्सत के पल में उर्दू शायरी और ग़ज़लें पढ़ना बेहद पसंद है, जिसकी झलक उनकी कहानियों में साफ दिखती है।

इनका जन्म पंजाब राज्य के एक गाँव में हुआ था। इन्होंने पंजाब विश्वद्यालय, चंडीगढ़ से ही उच्च शिक्षा ग्रहण की है। यह लगभग २० वर्षों से रुचि के अनुरूप लिख रही हैं। पहली रचना का सृजन २००४ में किया था। अब तक यह ५०० से अधिक रचनाओं का सृजन कर चुकी हैं और इनके अनुसार लेखन एक ज़िम्मेदारी से भरा हुआ रचनात्मक कार्य है। भारत में यह पेशे से हिन्दी अध्यापिका रही हैं। आजकल यह कैनेडा का स्थाई आवास प्राप्त करके वहीं बस चुकी हैं। इनके मनपसंद लेखक मुंशी प्रेमचंद व महादेवी वर्मा हैं, जिनके उपन्यास और काव्य-रचनायें अधिक पसंद हैं। इन्हें स्वयं कविता, कहानी, व्यंग्यात्मक लेख लिखना अधिक पसंद है। यह पंजाबी व हिन्दी भाषाओं में रचनाओं का सृजन करती हैं अब तक इनके 77 के लगभग साँझा काव्य संकलन प्रकाशित हो चुके हैं।

कौस्तुभ मुंबई के साकिन है। महाराष्ट्र के नागपुर शहर में पले-बढ़े और बचपन ही से शा’इरी में दिलचस्पी रही। आई. आई. टी. गांधीनगर में यांत्रिकी अभियांत्रिकी की शिक्षा प्राप्त करते हुए, प्रो. हमीदा बनो-चोपड़ा (हमीदा आपा) से उर्दू शा’इरी और लिपि की तालीम हासिल की। आज रसायनों के ख़रीद-ओ-फ़रोख़्त के मशग़ले के साथ-साथ उर्दू और खड़ी-बोली में ग़ज़ल, नज़्म और कविताएं कहते-लिखते हैं। तरक़्क़ी-पसंद और क्लासिकी उर्दू शा’इरी का ख़ासा प्रभाव रहा है। आपकी तहरीर में सामाजिक परिस्थितियों और, इंसानी हालात और फ़ितरत पर राय-ज़नी झलकेगी। शा’इरी के अलावा मौसीक़ी और आबी रंग मुसव्विरी में भी विशेष रूचि रखते हैं। आप के द्वारा रचित गीत सभी प्रसिद्ध म्यूज़िक स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं।

लखनऊ की २८ वर्षीया गृहिणी कावेरी अपने परिवार, किताबों और बागवानी के शौक के साथ एक शांत जीवन जीती हैं। सुबह की चाय के साथ बालकनी में बैठकर कहानियाँ गढ़ना और मानवीय रिश्तों की बारीक परतों को समझना उन्हें पसंद है। उनकी रचनाओं में रोज़मर्रा के जीवन की सादगी और भावनाओं की गहराई देखने को मिलती है। कावेरी का मानना है कि हर व्यक्ति के जीवन में एक अनकही कहानी होती है, जिसे शब्दों का रूप देना उन्हें सुकून देता है। उनकी लेखनी आपको ऐसी ही छोटी-छोटी, पर दिल को छू लेने वाली कहानियों के संसार में ले जाएगी।

किरण अपने परिवार के साथ बिहार के छपरा जिले में जीवन व्यतीत करती हैं। इन्होने गृह विज्ञान और अंग्रेज़ी में स्नातकोत्तर की पढ़ाई की है एवं संगीत, साहित्य, हास्य और आध्यात्म में इनकी विशेष रूचि है।

कुमुद को बचपन से ही कविता लिखने का शौक रहा है। वह अक्सर अपने पिता के साथ कवि-सम्मेलनों में जाती थीं, जहाँ विभिन्न कवियों की रचनाएँ सुनना उन्हें अत्यंत प्रिय था। बचपन में कवि-सम्मेलनों से मिली इसी प्रेरणा ने उनकी कविताओं को एक विशिष्ट दिशा दी। उनका स्वभाव सरल है, उन्हें सादगी प्रिय है, और वह प्रकृति के बेहद करीब हैं। एक आईटी प्रोफेशनल होने के नाते, जहाँ वह कोडिंग की तार्किक दुनिया में दक्ष हैं, वहीं वह कविता के माध्यम से अपनी भावनाओं को सादगी और सौंदर्य के साथ सहजता से अभिव्यक्त करना भी बखूबी जानती हैं।

प्रतिज्ञान प्रकाशन के संस्थापक और प्रधान सम्पादक के तौर पर, आप हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों भाषाओं में कहानियाँ और कविताएँ लिखते हैं। आपका पहला काव्य संग्रह, ‘I Hear The Dead’, जंग की त्रासदी पर इक्कीस कविताओं के माध्यम से एक मार्मिक कहानी बुनता है। समकालीन हिंदी साहित्य के रचनाकारों को एक मंच और सम्मान दिलाना आपका प्रमुख संकल्प है।

झांसी, उत्तर प्रदेश में पली बढ़ी पूजा शुक्ला पेशे से एक बैंकर हैं जो मुंबई में कार्यरत हैं, और निजी जिंदगी में वो एक शांत और अंतर्मुखी स्वभाव रखती हैं, जो बोलती कम हैं और महसूस ज्यादा कर पाती हैं। ज़िंदगी में आए कुछ निजी हादसों ने उसका रुख कविताओं की तरफ मोड़ दिया। दर्द ने जब उसे घेरा, तो उसने दुनिया से नहीं, बल्कि लफ़्ज़ों से दोस्ती कर ली। वो ज़्यादातर तन्हाई, खालीपन, उदासी, और टूटे दिलों पर लिखती है। उसे लगता है कि इन भावों पर लोग कम बात करते हैं, और इन पर ज्यादा बात होनी चाहिए।

प्रियांक आईआईटी बॉम्बे के आशिंक देसाई सेंटर फॉर पॉलिसी स्टडीज से पीएचडी कर रहे हैं। उनका मानना है कि मानव जीवन की जटिलताओं को अकादमिक विषयों की तुलना में कविताएँ अधिक बेहतर ढंग से दर्शाती हैं।

पूजा एक कथाकार और मीडिया पेशेवर हैं, जिनकी रचनात्मक यात्रा रेडियो, पत्रकारिता और शिक्षा के माध्यम से गुज़री है। मास कम्युनिकेशन की प्रष्ठभूमि से आकर, आपने अपने शुरुआती करियर में जनसम्पर्क (PR), सोशल मीडिया मार्केटिंग, और कई सामाजिक विकास परियोजनाओं पर काम किया। 

आपका पहला बड़ा ब्रेक ऑल इंडिया रेडियो, पटना में आया, जहाँ आप एक कलाकार और कथावाचक के रूप में निखरीं। इसके उपरांत, आपको डिजिटल मार्केटिंग, वेब लेखन और कम्युनिटी लीडरशिप (लेखक समुदाय) के क्षेत्र में आगे सीखने और बढ़ने का अवसर प्राप्त हुआ। पूजा का मानना है कि उनका लेखन रोज़मर्रा के जीवन और गहन अवलोकन पर आधारित है; वह दृढ़ता से मानती हैं कि यदि अनुभवों को शब्दों में ढालने का कौशल है, तो उन्हें व्यक्त करना आवश्यक है। वर्तमान में, वह अपने सभी अनुभवों को एकत्रित कर, अपनी रचनात्मक एजेंसी, ‘क्रिएटिव भर्ता’ (Creative Bhartaa) का सफलतापूवक संचालन कर रही हैं।

डॉ. रेखा रानी लंबे समय से हिंदी लेखन में सक्रिय हैं। उन्होंने नालंदा ओपन विश्वविद्यालय के लिए अध्ययन-सामग्री तैयार की है। इसके अलावा, उन्होंने मगधी कविताओं का हिंदी रूपांतरण और एक शोध-स्तरीय पुस्तक का अनुवाद भी किया है। भारत सरकार द्वारा आयोजित हिंदी निबंध प्रतियोगिता में उन्हें तृतीय स्थान प्राप्त हुआ है। उनकी कई पुस्तकें व काव्य-संग्रह अमेज़न पर उपलब्ध हैं। वह एक लेखिका, मनोवैज्ञानिक परामर्शदाता और पूर्व प्रोफेसर (मनोविज्ञान) हैं।

रोनिता कवियत्री और लेखिका हैं। उनकी कविताएँ, लेख और कहानियाँ भारतीय और अंतरराष्ट्रीय अंग्रेजी साहित्यिक पत्रिकाएँ और संकलन में प्रकाशित हुए है जिनमें The Hooghly Review, Akéwì Magazine, RIC Journal, FemAsia, Porch Lit Magazine, Sídhe Press, Rough Diamond Poetry और Bare Bones शामिल हैं। उनकी माइक्रो चैपबुक Preparing to be Wrecked हाल ही में अमरीकी प्रकाशक Emerge Literary Journal द्वारा एक संकलन में प्रकाशित की गयी है। हिन्दी में प्रकाशन का सफर प्रतिज्ञान के साथ शुरू हुआ है।

सारंग क्लीन-टेक सेक्टर में काम करने वाले एक उद्यमी हैं। वे सप्ताहंत में लिखने में समय बिताना पसंद करते हैं। वह जापानी कविता रूपों के एक उत्सुक छात्र हैं और ‘सेनर्यू’ लिखना पसंद करते हैं। वह कभी-कभी निबंध और लघु कथाएँ  भी लिखते हैं।

मुंबई निवासी शिव आधुनिक युग के उन विरल रचनाकारों में से हैं जो अपने आईटी पेशेवर जीवन के साथ-साथ एक संवेदनशील कवि और चिंतक की भूमिका निभाते हैं। वे तकनीक और भारतीय परंपरा के बीच एक सजीव सेतु रचते हैं। शिव की लेखनी में रामचरितमानस, संत कवियों के दोहों और मानव अनुभवों की सूक्ष्म संवेदनाएँ सहजता से मिलती हैं। उनका लक्ष्य है कि शब्दों के माध्यम से वे भी आने वाली पीढ़ी के लिए ज्ञान के अनमोल रतन छोड़ जाएँ, ठीक उसी तरह जैसे हमारे पुराने ऋषियों और कवियों ने किया था। आप प्रतिज्ञान प्रकाशन के सह-सम्पादक हैं।

सोनी जी ने ह्यूमैनिटीज़ में पीएचडी की है और इंश्योरेंस और रिस्क मैनेजमेंट में मास्टर्स डिग्री हासिल की है। उन्हें पढ़ने और लिखने का बहुत शौक है। वो आम लोगों की ज़िंदगी और उनसे जुड़ी सच्ची कहानियों पर अपने विचार और कहानियाँ लिखना पसंद करती हैं।

तेजस्विनी एक संवेदनशील लेखिका, कवयित्री और कहानीकार हैं। उन्हें शब्दों के माध्यम से भावनाओं, रिश्तों और जीवन के सूक्ष्म अनुभवों को अभिव्यक्त करना पसंद है। उनकी रचनाओं में प्रेम, आत्मचिंतन, स्त्री मन, सामाजिक यथार्थ और आध्यात्मिक अनुभूतियों की झलक मिलती है। लेखन उनके लिए केवल अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि आत्मसंवाद और आत्मखोज का माध्यम है। वर्तमान में वे कहानियाँ, कविताएँ, गीत और ब्लॉग लेखन में सक्रिय हैं तथा साहित्य और सृजनात्मक लेखन के क्षेत्र में निरंतर सीखने और प्रयोग करने में विश्वास रखती हैं।


इस पुस्तक में व्यक्त विचार लेखकों के अपने हैं। यद्यपि सामग्री का यथासंभव तथ्यात्मक सत्यापन किया गया है, तथापि प्रकाशक किसी भी रूप से इसके लिए उत्तरदायी नहीं है।

इस पुस्तक के सर्वाधिकार सुरक्षित हैं। किसी भी रूप में इसके सम्पूर्ण या किसी अंश के पुनरुत्पादन के लिए प्रकाशक/लेखक की पूर्वानुमति आवश्यक है।


हम सभी भाषाओं और विधाओं में लिखी गई मौलिक रचनाओं का स्वागत करते हैं। अपनी रचनाएं हमारे साथ साझा करें और प्रत्तिज्ञान के व्यापक पाठक वर्ग तक अपनी आवाज़ पहुंचाएं।

समकालीन हिंदी साहित्य के उभरते रचनाकारों को जानने के लिए हमसे इंस्टाग्राम पर जुड़ें और हमारी मासिक हिंदी साहित्यिक पत्रिका ‘प्रतिज्ञान’ पढ़ें।