अटल जी की कवितायें मैं आज भी जब भी पढ़ता हूँ, सुनता हूँ या सुनाता हूँ, एक आत्मविश्वास जागृत हो जाता है। खुद पर भरोसा कायम हो जाता है। अटल जी की कविता ढाढस बंधा देती है, मार्गदर्शन करती है।  

अटल जी का व्यक्तित्व भी ऐसा ही था और उनकी कवितायें भी बिल्कुल ऐसी ही हैं। अटल जी की कविताओं का परिचय मैं अपने शब्दों में न देकर उनके शब्दों में दे रहा हूँ। अपनी कविताओं के विषय में अटल जी ने यह कहा था:

“मेरी कविता जंग का ऐलान है, पराजय की प्रस्तावना नहीं 
वह निराशा का स्वर नहीं, आत्मविश्वास का जय घोष है।”
- अटल बिहारी वाजपेयी

यह उन्होंने बिल्कुल सत्य और सटीक कहा अपनी कविताओं के परिचय में। अटल जी की कवितायें वाकई आत्मविश्वास का जयघोष हैं। 

आज १६ अगस्त है – पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की पुण्यतिथि। आज अच्छा अवसर है कि हम अपने ब्लॉग में अटल जी की कविताओं की चर्चा करें और कुछ चुनिंदा पंक्तियाँ आपसे साझा करें। 

अटल जी की एक सबसे लोकप्रिय कविता है ‘मौत से ठन गई’। उस कविता की कुछ पंक्तियाँ प्रस्तुत कर रहा हूँ आपके लिए:

जूझने का मेरा इरादा न था
मोड़ पर मिलेंगे इसका वादा ना था

रास्ता रोक कर वह खड़ी हो गई
यों लगा ज़िंदगी से बड़ी हो गई

मौत की उमर क्या, दो पल भी नहीं
ज़िंदगी सिलसिला, आज कल की नहीं

मैं जी भर जिया, मैं मन से मरूँ
लौट कर आऊँगा, कूच से क्यों डरूँ

तू दबे पाँव चोरी छिपे से न आ
सामने वार कर फिर मुझे आज़मा।

- अटल जी की कविता 'मौत से ठन गयी'

है ना हिम्मत बाँधने वाली यह पंक्तियां। मौत हो, मुसीबत हो, मुश्किलें हों, दुश्मन हो – उनसे आत्मविश्वास से यह कहना है कि ‘तू दबे पांव चोरी छिपे से न आ, सामने वार कर फिर मुझे आज़मा’ ।

और यही जज़्बा अटल जी की कविताओं में झलकता है।


अटल जी की कवितायें – एक झलक

अटल जी की पुण्यतिथि पर विशेष प्रस्तुति

अटल जी की कविता – चुनिंदा पंक्तियाँ

सर्वप्रथम अटल जी की कविता ‘गीत नया गाता हूँ’ कि कुछ पंक्तियाँ प्रस्तुत कर रहा हूँ।

इन्हें पढ़कर आप में जोश पैदा हो जाएगा – कभी हार न मानने वाला जोश। जैसा उन्होंने कहा था उनकी ‘कविता आत्मविश्वास का जयघोष है, पराजय की प्रस्तावना नहीं’। इस कविता में यही भावना छुपी है और यही संदेश मिलता है।

टूटे हुए सपनों की कौन सुने सिसकी
अंतर को चीर व्यथा पलकों पर ठिठकी

हार नहीं मानूँगा, रार नहीं ठानूँगा
काल के कपाल पे लिखता मिटाता हूँ

गीत नया गाता हूँ

- अटल जी की कविता 'गीत नया गाता हूँ'
अटल जी की कविता - पहचान
जन्म-मरण अविरत फेरा
जीवन बंजारों का डेरा

आज यहाँ, कल कहाँ कूच है
कौन जानता किधर सवेरा

अँधियारा आकाश असीमित, प्राणों के पंखों को तौलें
अपने ही मन से कुछ बोलें

- अटल जी की कविता ‘अपने ही मन से कुछ बोलें’

इस कविता में अटल जी ने जीवन की अनिश्चितता का बहुत ही सटीक वर्णन किया है। ‘जन्म मरण अविरत फेरा’ – क्या बात कही है। कौन जानता है आज यहाँ, कल कहाँ? कब अंधेरा, कब सवेरा?

जीवन वाकई एक पहेली है और ऐसे में किसी और के समर्थन का भरोसा करना या इंतज़ार करना निरर्थक हो सकता है। यह आवश्यक है कि आप खुद अपने पर भरोसा करें, अपना समर्थन करें, ‘अपने ही मन से कुछ बोलें’।

आपको अटल जी की कौन सी कवितायें सबसे ज्यादा पसंद हैं? अटल जी का कौन-कौन सा काव्य संग्रह आपने पढ़ रखा है? अपने विचार हमसे कमेंट्स में जरूर साझा करें। प्रणाम!


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