साहित्य के नए रंगमंच पर आपका स्वागत है! ज़िन्दगी एक रंगमंच, हर किरदार है बच्चन यहाँ…
‘प्रतिज्ञान’ के तेरहवें अंक में हम आपके सामने साहित्य का एक अनूठा संगम लेकर आए हैं। इस अंक का संपूर्ण केंद्र ‘किरदार’ है, फिर चाहे वह किसी रचना का नायक हो या खलनायक, कोई पुरुष हो या स्त्री, कोई जीव-जंतु हो, निर्जीव वस्तु या फिर विशुद्ध कल्पना! विगत बारह अंकों के सफ़र के बाद, अब ‘प्रतिज्ञान’ किंडल ई-बुक से आगे बढ़कर एक नये और आकर्षक फ्लिप-बुक (Flipbook) के रूप में आपके सामने है। अब आप कहीं भी, कभी भी और किसी भी डिवाइस पर हिंदी साहित्य के इस बेहतरीन संग्रह को पूर्णतः निःशुल्क पढ़ सकते हैं।
नीचे दिए गए डिजिटल फ्लिप-बुक के पन्नों को पलटिए और शब्दों के इस रंगमंच का आनंद लीजिए।
नायक या खलनायक – इस अंक के आकर्षण
- विभिन्न साहित्यिक विधाएँ: कहानियों, कविताओं, पत्रों और विचारशील लेखों का एक बेजोड़ और विविधतापूर्ण समावेश।
- किरदार-केंद्रित रचनाएँ: हर रचना का केंद्र एक सशक्त चरित्र है, जो सामाजिक संवेदनों, मानसिक अंतर्द्वंद्वों और मानवीय संबंधों की गहराई को उजागर करता है।
- निःशुल्क और सुलभ पठन: अब किसी डाउनलोड या सब्सक्रिप्शन की आवश्यकता नहीं! सीधे हमारी वेबसाइट पर एक क्लिक में पढ़ें और दोस्तों के साथ शेयर करें।
संपादक की कलम से
एक सोच और एक संकल्प से ‘प्रतिज्ञान’ का यह सफर आरम्भ हुआ था। समकालीन हिंदी साहित्य का सृजन करने वाले रचनाकारों को एक निष्पक्ष, समावेशी और निरंतर बेहतर होता मंच प्रदान करने का संकल्प। आइए, नायकों और खलनायकों के इस नए संगम का हिस्सा बनिए और साहित्य के इस कारवाँ को आगे बढ़ाइए।
नितेश मोहन वर्मा (संपादक, प्रतिज्ञान प्रकाशन)
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