कभी मजबूरी, कभी फितरत और कभी साजिश। इंसान कई चेहरे लगाता है। हमने ‘प्रतिज्ञान’ परिवार के सदस्यों से आग्रह किया की ‘मुखौटा’ शब्द पर अपने ख़याल लिख कर भेजें। अभी पढ़ें।
झुर्रियों में सिमटा जीवन – एक बुज़ुर्ग चेहरे पर ५ कविताएँ और १ कहानी
एक तस्वीर, ६ रचनाएँ। उस गरीब बूढ़े की आँखों में झाँकिए जिसके संघर्ष और अकेलेपन को ५ कवियों और १ कहानीकार ने अपनी मार्मिक कलम से आवाज़ दी है। हृदयस्पर्शी रचनाओं का संग्रह।
हरिवंश राय बच्चन की मधुबाला क्या कहती है | एक समीक्षा
क्या कहती है मधुबाला? हरिवंश राय बच्चन जी के गीत काव्य मधुबाला की समीक्षा प्रस्तुत कर रहा हूँ। अकी पने आप को धन्य समझता हूँ कि मैं इतनी महत्वपूर्ण काव्य रचना की समीक्षा अपने पाठकों के सामने प्रस्तुत कर पा रहा हूँ।
ख्वाहिश दिल की (पुस्तक समीक्षा)
कवि ने बेहद खूबसूरती और सादगी से अपने दिल की ख्वाहिशों को कागज़ पर स्याही से उड़ेल दिया है। एकदम सरल भाषा में लिखने का ये बहुत निराला अंदाज़ है। ज़रूर पढ़ें।
मरीचि की डोरियाँ – दिल छू लेती रश्मि शुक्ला की कवितायें
मरीचि की डोरियों में कवियित्री ने अनमोल मोतियोँ को पिरोया है। रश्मि जी का पहला काव्य संकलन एक सराहनीय प्रयास है। इन्होंने कविताओं, ग़ज़लों और गीतों के माध्यम से हमारे रोज़मर्रा के जीवन के कई पहलूओं को छूआ है और कुछ को झंझोरा है।
पुस्तक समीक्षा – संग लेकर चलो
"संग लेकर चलो" १०६ कविताओं का संग्रह है। कवि ने अनेक विषयों पर काफी सरल हिंदी में अपनी कवितायें प्रस्तुत की हैं। माता-पिता, जीवन संघर्ष, प्रेम, गरीबी, शहर और कई सारे विषयों पर इनके ख़याल बहुत सराहनीय हैं।