हिंदी कविता संग्रह “संग लेकर चलो” जगदर्शन जी की तीसरी साहित्यिक रचना है। कुछ दिनों पहले पोस्ट के माध्यम से जगदर्शन जी ने ये पुस्तक मुझे भेंट की। इस पुस्तक समीक्षा में मैं इस काव्य संग्रह की अपनी सबसे पसंदीदा कवितायें आपसे साझा कर रहा हूँ।
संग लेकर चलो
कवि: जगदर्शन सिंह बिष्ट
प्रकाशक: समय साक्ष्य
“संग लेकर चलो” १०६ कविताओं का संग्रह है। कवि ने अनेक विषयों पर काफी सरल हिंदी में अपनी कवितायें प्रस्तुत की हैं। माता-पिता, जीवन संघर्ष, प्रेम, गरीबी, शहर और कई सारे विषयों पर इनके ख़याल बहुत सराहनीय हैं।
अगर पंछियों के हौसले न होते
जगदर्शन सिंह बिष्ट | काव्य संग्रह “संग लेकर चलो”
शाखों पर लटके घोंसले न होते
मुझे ये ६ कवितायें सबसे ज्यादा पसंद आई:
- कवियत्री माँ
- गृहिणी
- फिरता हूँ
- कह दो
- हौसले
- क्यूँ है
जगदर्शन की के शब्दों में इस काव्य संग्रह का वर्णन:
“जीवन के सफर में हर व्यक्ति अपनी भावनाओं को संग लेकर चलता है। मेरे संग जीवन के सफर में जो भी भावनायें चलती रही उनको इस काव्य संग्रह के रूप में एक मुकाम हासिल हुआ है।”
ये पुस्तक आप अमेज़न पर खरीद सकते हैं। ज़रूर पढ़ें और अपने विचार नीचे कमैंट्स में साझा करें। धन्यवाद।
“पुस्तक समीक्षा – संग लेकर चलो&rdquo पर एक विचार;