शहर की ज़िन्दगी पे शायरी और कविता

दो शब्द – शहर और ज़िन्दगी | हिंदी पोएट्री प्रॉम्ट

पढ़िए शहर की ज़िन्दगी पर कुछ दिग्गज शायरों के साथ नए रचनाकारों की कवितायेँ और ख़याल। हमारी हिंदी पोएट्री प्रॉम्प्ट की श्रृंखला की ये दूसरी पेशकश है।

हिंदी कविता - बाज़ार

बाज़ार – हिंदी कविता

त्योहारों का मौसम है। दशहरा बीता, अब दिवाली की धूम है बाज़ार में। फिर क्रिसमस, फिर नया साल, फिर कुछ और। बाज़ार का ये जश्न, ये रौनक, तुम्हारे बिक जाने का त्यौहार है।

सुकून के कुछ पल शायरी और कविताएं

सुकून के कुछ पल – चुनिंदा शायरी और कविताएं

सुकून के कुछ पल तलाश करने आपका पहाड़ों पे जाकर ध्यान-मग्न होना ज़रूरी नहीं है। शहर की आपा-धापी के बीच में भी आप सुकून के कुछ पल तलाश सकते हैं।

A temple on cuttack road used as cover image for hindi poem Kulhad And Sawaal.

कुल्हड़ और सवाल

सवेरे सात बजे, बिना इज़ाज़त किसी भले मानस की काली स्कूटर पे बैठ | चेहरे पर खिलती धूप, बीच बाजार अंगड़ाई ली, हाथ पाँव लिया ऐंठ | भुबनेश्वर में सवेरे चाय पीने निकला और चाय की चुस्कियों के साथ आपके लिए ये एक छोटी सी कविता लिख डाली |