इस बाज़ार की हर चमचमाती दुकान
तुम्हे छलने का औज़ार है
कैसे तुम खरीद लो ज़रुरत से ज़्यादा
इस बाज़ार का यही व्यापार है ।
त्योहारों का मौसम है। दशहरा बीता, अब दिवाली की धूम है बाज़ार में। फिर क्रिसमस, फिर नया साल, फिर कुछ और। कुछ और। और कुछ नहीं, तो इस धूम को बरकरार रखने की लिए बाज़ार कोई नया बहाना ईजाद कर लेना सीख चुका है।
तुम बाज़ार खरीदो। धीरे-धीरे ये बाज़ार तुम्हे खरीद लेगा।
हिंदी कविता – बाज़ार
इस बाज़ार की हर चमचमाती दुकान
तुम्हे छलने का औज़ार है
कैसे तुम खरीद लो ज़रुरत से ज़्यादा
इस बाज़ार का यही व्यापार है
महीने दर महीने बदलती टेक्नोलॉजी
नीली जीन्स, पीली कमीज़
तेज़ पँखा, बेहतर डिग्री
अमेरिकन कॉर्न, इटैलियन चीज़
मर्ज़ की दवा, दवा का मर्ज़
आज खरीदो, कल चुकाओ
चुकाने को मिलता क़र्ज़
जन्म, मृत्यु, ख़ुशी और मातम
सबकी लग गयी बोली
तुम बिक भी जाओ अगर
ज़रुरत ख़त्म न होगी
बाज़ार का ये जश्न, ये रौनक
तुम्हारे बिक जाने का त्यौहार है
कैसे तुम खरीद लो ज़रुरत से ज़्यादा
इस बाज़ार का यही व्यापार है ।
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बहुत खूब।
बहुत शुक्रिया आपका।