मुखौटा पर अकबर हैदराबादी का शेर

मुखौटा – मजबूरी, फितरत या साजिश | हिंदी कविता प्रॉम्प्ट

कभी मजबूरी, कभी फितरत और कभी साजिश। इंसान कई चेहरे लगाता है। हमने ‘प्रतिज्ञान’ परिवार के सदस्यों से आग्रह किया की ‘मुखौटा’ शब्द पर अपने ख़याल लिख कर भेजें। अभी पढ़ें।

एक बुज़ुर्ग चेहरे पर ५ कविताएँ और १ कहानी

झुर्रियों में सिमटा जीवन – एक बुज़ुर्ग चेहरे पर ५ कविताएँ और १ कहानी

एक तस्वीर, ६ रचनाएँ। उस गरीब बूढ़े की आँखों में झाँकिए जिसके संघर्ष और अकेलेपन को ५ कवियों और १ कहानीकार ने अपनी मार्मिक कलम से आवाज़ दी है। हृदयस्पर्शी रचनाओं का संग्रह।

शहर की ज़िन्दगी पे शायरी और कविता

दो शब्द – शहर और ज़िन्दगी | हिंदी पोएट्री प्रॉम्ट

पढ़िए शहर की ज़िन्दगी पर कुछ दिग्गज शायरों के साथ नए रचनाकारों की कवितायेँ और ख़याल। हमारी हिंदी पोएट्री प्रॉम्प्ट की श्रृंखला की ये दूसरी पेशकश है।

हिंदी पोएट्री प्रॉम्प्ट खामोश चीख

खामोश चीख – हमारा पहला हिंदी पोएट्री प्रॉम्ट | काव्य प्रेरणा

इस सितम्बर महीने की पहली तारीख को हमने एक नयी पहल की - हमारे इंस्टाग्राम प्रोफाइल पर हमने हमारा पहला हिंदी पोएट्री प्रॉम्प्ट साझा किया। पढ़िए इस प्रॉम्प्ट पर लिखी चुनिंदा कवितायेँ।