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“दहलीज़ पर रुकी यादें” सिर्फ़ कहानियों का संग्रह नहीं, बल्कि उन अनकहे एहसासों और स्मृतियों की यात्रा है जो हर घर के आँगन, चौखट और दिलों में बसे होते हैं। यह पुस्तक हमें याद दिलाती है कि किसी घर की सबसे मज़बूत नींव ईंट-पत्थरों से नहीं, बल्कि इंतज़ार, अपनों की हँसी और अनगिनत यादों से बनती है।
- लेखिका: तेजस्विनी अरविन्द नवले
- भाषा: हिंदी
- विधा: कथा संग्रह / भावुक संस्मरण
Description
किसी घर की सबसे मज़बूत नींव ईंटों से नहीं बनती। वह बनती है किसी के इंतज़ार से, किसी की हँसी से, किसी के साथ होने से, और उन अनगिनत यादों से, जिन्हें समय का बहता दरिया भी कभी मिटा नहीं पाता।
“दहलीज़ पर रुकी यादें” तेजस्विनी अरविन्द नवले द्वारा रचित ऐसी आत्मीय और भावपूर्ण कहानियों का सुंदर संग्रह है, जहाँ हर दहलीज़ के उस पार एक रिश्ता, एक भूली-बिसरी स्मृति और एक अनकहा एहसास आपका इंतज़ार करता है।
इन पन्नों को पलटते हुए, हो सकता है आपको अपना बीता हुआ अतीत मिले। हो सकता है… अपना वर्तमान। और शायद, वह घर भी, जिसे आपने ज़िंदगी की आपाधापी में कभी छोड़ा ही नहीं था।
यह पुस्तक क्यों पढ़ें?
- दिलों को छू लेने वाली कहानियाँ : घर, परिवार, रिश्तों और पुरानी यादों के तानों-बाने से बुनी गई सहज एवं मार्मिक कथाएँ।
- अपनत्व और नॉस्टैल्जिया का अहसास : हर पाठक को अपनी जड़ों, अपने आँगन और अपनों के इंतज़ार से जोड़ने वाला लेखन।
- सरल एवं प्रवाहपूर्ण भाषा : तेजस्विनी अरविन्द नवले की सीधी और दिल में उतर जाने वाली हिंदी शैली, जो हर उम्र के पाठक को बाँधकर रखती है।
- एक बेहतरीन उपहार : उन सभी के लिए जो साहित्य, जीवन के एहसासों और घर की गर्माहट से प्रेम करते हैं।
पुस्तक विवरण :
- शीर्षक : दहलीज़ पर रुकी यादें
- लेखिका : तेजस्विनी अरविन्द नवले
- भाषा : हिंदी
- श्रेणी : हिंदी साहित्य / कथा संग्रह
Additional information
| Weight | 0.270 kg |
|---|---|
| Dimensions | 21 × 14.8 × 0.8 cm |




देहलीज़ पर रूकी यादें, बहुत ही संजीदा और भावपूर्ण कहानियों का संग्रह है. हर कहानी घर के इक अलग और नये आयाम को छूती है और पाठक इन कहानियों में अपने जीवन की झलक निश्चित ही पाता है. सरल भाषा में तेजस्वीनी जी ने घर से जुडी गहरी संवेदनाओं को कहानियों के रूप में अभिव्यक्त किया है. इस पुस्तक को ज़रूर पढ़ें!