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“शब्द जो होठों तक आकर ठहर गए, पंक्तियों में ढलकर अमर हो गए।”
‘अनकही’ प्रतिज्ञान प्रकाशन द्वारा प्रकाशित एक भावपूर्ण और संवेदनशील हिंदी काव्य-संग्रह है। यह पुस्तक जीवन के उन अनछुपे पहलुओं, अनकहे अहसासों और भीतर छुपे जज़्बातों की एक सुंदर अभिव्यक्ति है, जिन्हें हम अक्सर बयां नहीं कर पाते।
- शैली: हिंदी कविता
- प्रकाशक: प्रतिज्ञान प्रकाशन
- प्रारूप: पेपरबैक
Description
‘अनकही’ केवल कविताओं का संग्रह नहीं, बल्कि मन की उन अतल गहराइयों की यात्रा है जहाँ विचार और भावनाएँ बिना किसी आवरण के साँस लेती हैं। जीवन की धूप-छाँव, रिश्तों की मिठास और खटास, अकेलापन, प्रेम, संघर्ष और आत्म-खोज के विभिन्न रंगों को पिरोकर यह संग्रह तैयार किया गया है।
इस काव्य-संग्रह की प्रत्येक कविता पाठक को स्वयं से जोड़ने और अपने भीतर छिपी हुई ‘अनकही’ बातों को महसूस करने का अवसर देती है। सरल, सहज और दिल को छू लेने वाली काव्य-शैली इस पुस्तक को हर साहित्य प्रेमी के लिए एक विशेष उपहार बनाती है।
मुख्य विशेषताएँ:
- हृदयस्पर्शी रचनाएँ : ऐसी कविताएँ जो सीधे पाठक के दिल में उतरती हैं और पुरानी यादों व भावनाओं को तरोताज़ा करती हैं।
- सहज एवं प्रवाही भाषा : भाषा की सादगी और विचारों की गहराई का बेहतरीन सामंजस्य।
- उत्कृष्ट मुद्रण एवं आवरण : प्रतिज्ञान प्रकाशन द्वारा उच्च गुणवत्ता के साथ प्रकाशित।
- साहित्य प्रेमियों के लिए उपहार : यदि आप हिंदी कविता और समकालीन साहित्य के शौकीन हैं, तो यह पुस्तक आपके संग्रह का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनेगी।
पाठकों के लिए एक पंक्ति:
“कुछ बातें जो कही न गईं, कुछ शब्द जो लिखे न गए… आज वो सब आपके सामने हैं, ‘अनकही’ के रूप में।”
आज ही अपनी प्रति ऑर्डर करें और काव्य के इस अहसास से जुड़ें!
Additional information
| Weight | 0.220 kg |
|---|---|
| Dimensions | 21 × 14.8 × 0.6 cm |





