रोशेल पोतकर की कहानियों का संग्रह “बॉम्बे हैंगओवर्स” मुंबई शहर के हर कोने से उपजी विविध भावनाओं और अनुभवों को दर्शाता है। डॉ. दिव्या जोशी द्वारा खूबसूरती से हिंदी में अनुवादित, यह किताब पाठकों को मुंबई की जटिल आत्मा में डुबो देती है, एक ऐसा हैंगओवर जो उतरने का नाम नहीं लेता।

१५ कहानियों के माध्यम से, रोशेल महत्वाकांक्षा, वासना, पहचान और अस्तित्व के संघर्षों को उजागर करती हैं, जो सभी मुंबई की अनूठी पृष्ठभूमि में बुने हुए हैं।

पोतकर की शैली में एक अद्भुत नयापन है। दिव्या जोशी का अनुवाद विचारोत्तेजक है। 
- नमिता गोखले

शहर का सार और उसके किरदार

पुस्तक की दूसरी कहानी, “सुगंध”, मुंबई के नशे को पकड़ती है। मुख्य पात्र, ‘रूसी’, अपनी अनूठी सुगंधों में रुचि के माध्यम से पाठकों को शहर से परिचित कराता है।

पेडर रोड से कमाठीपुरा तक, जसलोक अस्पताल, ईरानी रेस्तरां, मरीन ड्राइव, ग्रांट रोड, लोकल ट्रेनें, बेस्ट बसें, फ्लोरा फाउंटेन और चर्चगेट स्टेशन का उल्लेख मुंबई के प्रतिष्ठित स्थलों की एक श्रृंखला बनाता है। ये स्थान सिर्फ नाम नहीं हैं; वे शहर के किरदार के अभिन्न अंग हैं। रूसी और मेरिनेट का विवाहित संबंध, और रूसी और स्टेला का प्रेम प्रसंग, मानवीय रिश्तों की जटिल परतों को दर्शाते हैं जो शहर के ताने-बाने को बुनते हैं।

“फैब्रिक” अस्सी और नब्बे के दशक के मुंबई की याद दिलाता है, जो कपड़ा मिलों,  मज़गाँव डॉक, मजदूरों की हड़तालों और अंडरवर्ल्ड के दखल के साथ बॉलीवुड की फिल्मों में अक्सर चित्रित किया गया है। कहानी एक महत्वाकांक्षी मिल मजदूर के जीवन के माध्यम से एक व्यक्तिगत लेंस प्रदान करती है, जो शहर के बदलते परिदृश्य और इसके निवासियों पर इसके प्रभाव को दर्शाता है।


बॉम्बे हैंगओवर्स में महत्वाकांक्षा की विविध छवियाँ

मुंबई को अक्सर महत्वाकांक्षा का पर्याय माना जाता है, और रोशेल अपनी कहानियों में इस विषय को विविध रूपों में प्रस्तुत करती हैं।

  • नारायण की यौन महत्वाकांक्षा को “स्तनों का अंकगणित” में दर्शाया गया है। यह कहानी कौमार्य की जिज्ञासा, विवाह, यौन संबंध और वैवाहिक जीवन की सूक्ष्म, महत्वपूर्ण बारीकियों को संवेदनशीलता के साथ दर्शाती है। मुनिका के सुडौल स्तनों और नारायण के उन पर आकर्षण के माध्यम से, रोशेल वैवाहिक आनंद के परिचित मार्ग को नेविगेट करती हैं, उपयुक्त और सटीक शब्द चयन के साथ।
  • रूसी की सुगंध के प्रति महत्वाकांक्षा “सुगंध” को चलाती है।
  • कैलाश की करियर और पदोन्नति की महत्वाकांक्षा शहर की प्रतिस्पर्धी भावना को उजागर करती है।
  • “सम्मान” में पूर्णा की अपने पैरों पर खड़े होने और सम्मान पाने की महत्वाकांक्षा को दर्शाया गया है। धोबी घाट में उसका जीवन, उसका बलात्कारी और हत्यारा भाई पकिया, और उसकी बीमार, बूढ़ी माँ और भगोड़ा पिता, ये सभी उसके सम्मान के संघर्ष में अपनी भूमिका निभाते हैं। 
  • कई प्रेमियों की चाहत “हमारे महबूब” में सामने आती है। यह मेरी पसंदीदा कहानियों में से एक है। नायिका, मलाइका और सरस्वती के तीन अलग-अलग दृष्टिकोण मानवीय इच्छाओं की जटिलता को उजागर करते हैं। नायिका की अपने पति, ग्लेन के साथ यौन संबंध बनाते समय मलाइका के कई प्रेमियों को याद करने की प्रवृत्ति, और सरस्वती की केवल एक प्रेमी को याद करने की प्रवृत्ति, यहां तक कि जब उसे अन्य पुरुषों द्वारा शारीरिक रूप से अपमानित किया जाता है, रिश्तों और पहचान के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालता है।

यह महत्वाकांक्षा, समुद्र, इमारतों और सड़कों से परे, मुंबई के चरित्र का एक अभिन्न अंग है, जो इसे अन्य शहरों से अलग करता है।

मानवीय मानस की गहराई में उतरना

रोशेल के पात्र सिर्फ मुंबई की पृष्ठभूमि में नहीं रहते; वे इसे जीते हैं और उससे सांस लेते हैं। उनकी कहानियां मानवीय मानस की गहराई में उतरती हैं, जटिल और अक्सर विरोधाभासी भावनाओं को उजागर करती हैं।

“अंतरात्मा की महक” दो समानांतर कहानियों और उनके पात्रों को एक अनोखे तरीके से प्रस्तुत करती है। रोशेल विवाहित व्यक्तियों में कामुकता को दर्शाती हैं जो अपने मौजूदा रिश्तों से संतुष्ट नहीं हैं और बाहर खुशी तलाशते हैं। शोनाली को तभी आनंद मिलता है जब उसे पता चलता है कि कोई और उसके सुख से ईर्ष्या कर रहा है। नील अपनी कामुकता को शांत करने के लिए अपनी कल्पना में विभिन्न परिदृश्य बनाता है। यह कहानी एक महिला लेखक द्वारा पुरुष यौन इच्छाओं, अपेक्षाओं और तरीकों का एक उत्कृष्ट चित्रण है।

“शोर” मेरी एक और पसंदीदा कहानी है। केह, जॉन और विल्सन, तीनों एक ही घर में रहते हैं, लेकिन अपने-अपने संघर्षों में फंसे हुए हैं। यह महानगरीय जीवन में अकेलेपन और अलगाव को दर्शाता है।

“सुबह” बलात्कार पीड़िता की खुद को फिर से खोजने, न्याय की तलाश करने और समाज की दोगली प्रतिक्रियाओं का सामना करने के संघर्ष को दर्शाती है। प्रीमा की मानसिक स्थिति का वर्णन इतनी कुशलता से किया गया है कि पाठक उसके दर्द और दुविधा को महसूस कर सकते हैं।

“उत्साह” और “पागलपन” दो जुड़े हुए कथानक हैं जो सामाजिक-आर्थिक बाधाओं के पार दोस्ती और मानवीय संबंध की पड़ताल करते हैं। नैना, एक अमीर परिवार से, अपने ससुर के पितृसत्तात्मक दृष्टिकोण से जूझती है। वह फातिमा, एक लॉन्जरी विक्रेता, और मुथु, एक डोसा विक्रेता, के साथ दोस्ती करती है। उनकी अलग-अलग दुनिया के बावजूद, वे अपनी आकांक्षाओं, सपनों और संघर्षों को साझा करते हैं। यह दोस्ती मुंबई की विशेषता है, जहां विभिन्न पृष्ठभूमि के लोग एक साथ आते हैं। “पागलपन” अरविंद, नवीन और शारदा के जीवन को छूता है, जो दूसरों की ईर्ष्यापूर्ण उपस्थिति से बाधित होते हैं, जो शहरी जीवन की भागदौड़ और प्रतिस्पर्धा को दर्शाता है।


बॉम्बे हैंगओवर्स में विविध पात्रों की एक गैलरी है

रोशेल ने अपनी पुस्तक में कई दिलचस्प पात्रों को गढ़ा है:

  • रूसी को सुगंधों के लिए एक अजीब स्नेह है, जो उसे लोगों को गंध के साथ जोड़ने और उन्हें याद रखने में मदद करता है।
  • शोनाली विवाहित पुरुषों के साथ संबंध बनाती है, लेकिन उसका रोमांच रिश्ते या यौन संबंध से नहीं आता है, बल्कि ईर्ष्या की भावना से आता है जो उस पुरुष की विवाहित पत्नी में उत्पन्न होती है। जब ईर्ष्या खत्म होती है, तो उसका रोमांच खत्म हो जाता है।
  • कमाठीपुरा में रहने वाला इस्माइल एक वेश्यालय में रहता है, उसके पास खोने के लिए कुछ भी नहीं है, फिर भी वह जो कुछ भी कमाता है उसे मुंबई रेसकोर्स में जुए में लगा देता है। कमाठीपुरा और रेसकोर्स दोनों मुंबई के चरित्र के आवश्यक हिस्से हैं।
  • नारायण, फातिमा, मुथु, प्रीति और कैलाश जैसे अन्य पात्र भी अपनी भावनाओं, महत्वाकांक्षाओं, अपेक्षाओं और सपनों के साथ समान रूप से दिलचस्प हैं।

रोशेल ने अपनी कहानियों में इन भावनाओं और महत्वाकांक्षाओं को खूबसूरती से उकेरा है, और डॉ. दिव्या जोशी ने उनका अंग्रेजी से हिंदी में समान सुंदरता और सटीकता के साथ अनुवाद किया है।

“बॉम्बे हैंगओवर्स” सिर्फ कहानियों का एक संग्रह नहीं है; यह एक ऐसा अनुभव है जो पाठक को मुंबई के नशे से सराबोर कर देता है, एक ऐसा हैंगओवर जो लंबे समय तक रहता है । यह शहर के दिल में एक गहरा गोता है, इसके लोगों, उनके सपनों और उन संघर्षों का एक अंतरंग चित्रण है जो उनके जीवन को आकार देते हैं। यह एक ऐसी किताब है जो मुंबई की आत्मा को वास्तव में समझती है और व्यक्त करती है।

रोशेल के किरदारों को जब मैं अलग-अलग कहानियों में पढ़ रहा था तो मैंने महसूस किया जैसे ये समानांतर कहानियां हैं। और मैंने वो पढ़ने की कोशिश की जो शब्दों में दर्ज नहीं किया गया है। 

क्या ये किरदार कभी आपस में टकराएंगे? किस परिस्थिति में? और उनके इस मिलने से क्या नयी कहानी जन्म लेगी?

“बॉम्बे हैंगओवर्स” की कहानियों को जोड़ने वाले कुछ प्रमुख सूत्र हैं:

  1. मुंबई का “हैंगओवर” (नशा): यह शहर खुद एक पात्र है। कहानियाँ शहर के विभिन्न पहलुओं – इसकी भागदौड़, अवसर, निराशाएँ, विविधता और इसकी आत्मा को दर्शाती हैं। चाहे वह रूसी की सुगंध हो, पूर्णा का धोबी घाट, या कैलाश की मिल स्ट्राइक, हर कहानी में मुंबई का एक अभिन्न हिस्सा झलकता है। शहर का यह नशा पात्रों के जीवन में एक स्थिर पृष्ठभूमि प्रदान करता है, जो उनकी महत्वाकांक्षाओं और संघर्षों को आकार देता है।
  2. मानवीय महत्वाकांक्षा के विभिन्न रूप: यह शायद सबसे महत्वपूर्ण जोड़ है। लगभग हर कहानी में एक पात्र या कई पात्र होते हैं जिनकी अपनी गहरी महत्वाकांक्षाएँ होती हैं:
    • नारायण की यौन संतुष्टि की महत्वाकांक्षा।
    • रूसी की सुगंधों के माध्यम से दुनिया को समझने की महत्वाकांक्षा।
    • कैलाश की करियर में आगे बढ़ने की महत्वाकांक्षा।
    • पूर्णा की सम्मान और आत्मनिर्भरता की महत्वाकांक्षा।
    • नैना की पितृसत्तात्मक समाज में खुद को साबित करने की महत्वाकांक्षा।
    • शोनाली की यौन रोमांच और दूसरों पर अपनी शक्ति स्थापित करने की महत्वाकांक्षा।
    • मलाइका और सरस्वती की रिश्तों और प्रेमियों के प्रति अलग-अलग महत्वाकांक्षाएँ। ये महत्वाकांक्षाएँ ही पात्रों को उनके कार्यों की ओर धकेलती हैं और उनके भाग्य को निर्धारित करती हैं।
  3. जटिल मानवीय रिश्ते और पहचान की खोज: कहानियाँ केवल व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं पर केंद्रित नहीं हैं, बल्कि वे रिश्तों की जटिलताओं को भी दर्शाती हैं। विवाहित रिश्ते (रूसी और मेरिनेट, नारायण और मुनिका), प्रेम प्रसंग (रूसी और स्टेला), दोस्ती (नैना, फातिमा और मुथु), और पारिवारिक संबंध (पूर्णा का परिवार) – सभी मानवीय संबंधों की बहुआयामी प्रकृति को दर्शाते हैं। ये रिश्ते अक्सर पात्रों की पहचान और उनके जीवन के उद्देश्य को परिभाषित करते हैं।
  4. सामाजिक-आर्थिक विभिन्नता और शहरी जीवन के संघर्ष: कहानियाँ मुंबई के सामाजिक-आर्थिक स्पेक्ट्रम को खूबसूरती से कवर करती हैं – मिल मजदूर से लेकर उच्च वर्ग के व्यक्तियों तक। वे शहरी जीवन की चुनौतियों को उजागर करती हैं, जैसे कि भीड़, प्रतिस्पर्धा, अपराध (“पागलपन”), और सामाजिक रूढ़ियाँ (“सुबह” में बलात्कार पीड़िता का संघर्ष)। ये संघर्ष पात्रों की महत्वाकांक्षाओं और उनके निर्णयों को प्रभावित करते हैं।
  5. मनुष्य की मनोवैज्ञानिक गहराई: रोशेल पात्रों के आंतरिक विचारों और भावनाओं को बड़ी बारीकी से दर्शाती हैं। नील की यौन कल्पनाएँ, शोनाली की ईर्ष्या से प्रेरित खुशी, प्रीमा का दर्द – ये सभी मानवीय मानस की जटिलताओं को उजागर करते हैं। लेखिका दिखाती हैं कि कैसे बाहरी दुनिया के साथ-साथ पात्रों का आंतरिक संसार भी उनके अनुभवों को आकार देता है।

इन पहलुओं को ध्यान में रखते हुए, आप पाएंगे कि भले ही हर कहानी एक अलग कथानक प्रस्तुत करती हो, वे सभी एक बड़े चित्र के हिस्से हैं – मुंबई शहर के भीतर मानवीय अनुभव का एक जटिल और विस्तृत चित्र। ये कहानियाँ हमें याद दिलाती हैं कि चाहे पृष्ठभूमि कोई भी हो, मनुष्य की मूल भावनाएँ और महत्वाकांक्षाएँ सार्वभौमिक होती हैं, लेकिन वे जिस वातावरण में फलती-फूलती हैं, वह उन्हें अद्वितीय रंग देता है।

डॉ. दिव्या जोशी ने इन कहानियों का अत्यंत सटीक, असरदार और प्रशंसनीय अनुवाद किया है। मैं उनका हृदय से धन्यवाद करता हूँ। उन्होंने रोशेल की अंग्रेज़ी में लिखी कहानियों और उनके किरदारों को हिंदी में जीवंत कर दिया है, जिससे हिंदी पाठकों के लिए भी मुंबई का यह नशा अनुभव करना संभव हो पाया है।

एक सफल कवि का गद्य कितना सेंसुअस हो सकता है, और कितना आवर्त्तमय – यह तो कहानियाँ पढ़ कर ही  चलेगा। आसान नहीं होता ऐसे गद्य  आवर्त पकड़ना, पर बधाई दिव्या को, उन्होंने हिंदी में उसका आवर्त बरता है।

अनामिका

आप अमेज़न और गरुड़ (प्रकाशक) की वेबसाइट पर बॉम्बे हैंगओवर पुस्तक खरीद सकते हैं। पढ़ने के बाद होने विचार हमें ईमेल करें या नीचे कमेंट करें।

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