अगर सोचो तो प्रेम बहुत सरल है। ये सच में कोई कारोबार नहीं है जैसा कई लोग बताते हैं। सरल है, दिल से दिल का ताल्लुक। और इसे ऐसा ही रहने दे। इसी भाव को दर्शाती है मेरी ये कविता

अगर सोचो तो प्रेम बहुत सरल है
उसके तुम दबे हुए ख्वाब पहचानो
उसके शब्द सभी सुनते हैं
तुम अनकहे जवाब पहचानो
थोड़ा छुपा पर रखती है वो
खुद को
अपने एहसास, अपनी जरूरतें
कभी बिना सवाल किए
बिल्कुल पास बैठ एक दिशा में देखना
वो सब कहेगी
तुम हामी भर देना
वो खिल जायेगी, जैसे श्वेत कंवल है
सोचो तो प्रेम बहुत सरल है।


इश्क बस इश्क होता है – हिंदी कविता

फिर ये भी है की प्रेम में किसी मुकम्मल मंज़िल की शर्त नहीं होती। किसी का हो जाने की कोई ख्वाहिश नही, वफा की आज़माईश नही।

कभी कभी इश्क बस इश्क होता है
सड़क के दो किनारों पे दो मुसाफिर
साथ चलना, पर साथ नही
किसी का हो जाने की कोई ख्वाहिश नही
भरोसा अटूट, वफा की आज़माईश नही
फिर एक मोड़ आता है
वो अपने रास्ते मुड़ जाते हैं,
कोई सवाल नही
रास्ता इतना ही क्यों,
कोई मलाल नही
क्षणिक होकर भी ताउम्र रहता है
कभी कभी इश्क बस इश्क रहता है।


ख्यालों में प्रेम – हिंदी कविता

छिहत्तर पन्नों पे जो मैं लिख डालूँ
उन्हें कुछ मेसेजेस में समेट लेता हूँ
अपना अल्हड़पन छुपाने
शहरी आवरण लपेट लेता हूँ
फिर जो तुमसे मिलने आऊँ
वो पूरा मैं नहीं होता
जो कभी मुझसे मिलना चाहो
आ जाना भरी दुपहरी छत पर तुम
कोने में पानी की टंकी से पीठ सटाकर
बैठा मिलूँगा
छज्जे की छाँव तले
चाय की खाली प्याली, चार अधजली सिगरेट
तनिक दूर से देख लेना, टोकना मत
भरी दुपहरी छत पर बैठा
सफेद पजामा, नीली चेक शर्ट पहने
खयालों में तुमसे प्रेम करता हूँ।


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प्रेम सरल है&rdquo पर एक विचार;

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