जो होंठों तक न आ सका, वह पन्नों पर उतरने को तैयार है। ‘अनकही’ – प्रतिज्ञान प्रकाशन का एक विशेष डिजिटल और प्रिंट काव्य-संग्रह। २२ समकालीन कवियों और कवयित्रियों का एक साझा प्रयास, अंतस की परतों को टटोलने का।
प्रतिज्ञान प्रकाशन का विशेष मोबाइल-अनुकूल डिजिटल काव्य-संग्रह (मुफ़्त PDF) अभी डाउनलोड करें।
"जब बातें अनकही
स्याही बन
पन्नों पर रिस जाती हैं
दफ़्न मौन उनका
फिर सदियों तक चीखता है…"


पन्नों पर कभी बिखरे, कभी अव्यवस्थित, तो कभी करीने से सजाए हुए ये स्याह अक्षर… कभी-कभी इन मौन अक्षरों का सामूहिक शोर भीतर तक झकझोर देता है।
यह संग्रह उन बातों, उन ख्यालों और उन सवालों का पुल है जो कभी कहे नहीं गए, और यदि कहे गए तो किसी ने उन्हें सुना नहीं। इस अनकही-अनसुनी के बीच न जाने कितनी ज़िंदगियाँ, कितने रिश्ते और कितने लोग अपनी सिसकियों, अपने ठहाकों और अपने एहसासों को भीतर ही दफ़्न करते चले जाते हैं।
‘अनकही’ से ‘कही’ की इस यात्रा में हमारे सहयात्री बनिए। इन अक्षरों के शोर को महसूस कीजिए और एक पहल कीजिए। अपनी अनकही को आवाज़ देने की, और अपनों की अनसुनी को सुन लेने की।
अनकही – विशेष मोबाइल-अनुकूल संस्करण
हमने इस डिजिटल संग्रह को पूरी तरह से मोबाइल स्क्रीन के लिए डिज़ाइन किया है ताकि आपको पढ़ते समय ज़ूम करने या परेशान होने की आवश्यकता न पड़े। यह पूरी तरह से निःशुल्क (Free) उपलब्ध है।
पेपरबैक संस्करण
जो पाठक डिजिटल स्क्रीन से परे, किताबों की खुशबू और पन्नों को पलटकर पढ़ने के पारंपरिक अहसास को जीना चाहते हैं, उनके लिए एक बेहतरीन खबर है।
‘अनकही’ बहुत जल्द अमेज़न (Amazon) पर शानदार पेपरबैक (प्रिंट) प्रारूप में ऑर्डर के लिए उपलब्ध होगी। पन्नों पर सजी इस मुकम्मल किताब को अपने निजी संग्रह का हिस्सा बनाने के लिए तैयार रहें!
किताबें – प्रतिज्ञान प्रकाशन
१. हिंदी साहित्यिक पत्रिका ‘प्रतिज्ञान’ – हर महीने सिर्फ अमेज़न किंडल पर
२. काव्य संग्रह “मैं – सूक्ष्म, प्यासा, मुखौटा”
३. प्रतिज्ञान वार्षिक संचयन अंक २०२६