हमारी मासिक हिंदी पत्रिका ‘प्रतिज्ञान’ का पहला अंक तैयार है। यह एक ईबुक के रूप में उपलब्ध है। आप प्रतिज्ञान का पहला अंक अमेज़न पर खरीद सकते हैं।
यह हिंदी पत्रिका सिर्फ शब्दों का संग्रह नहीं, बल्कि वर्तमान हिंदी साहित्य की नयी धड़कन है। हमारी कोशिश है हिंदी साहित्य जगत की उभरती प्रतिभाओं को एक मंच प्रदान करने की। आप तक चुनिंदा रचनाकारों को पहुँचाने की हमारी इस मुहीम में हमारा साथ दीजिये।
कहानियों, कविताओं, निबंधों और समीक्षाओं के माध्यम से हम हर महीने हिंदी साहित्य की नयी रचनायें आप तक पहुँचायेंगे। यहाँ आपको स्थापित लेखकों के साथ-साथ नए लिखने वालों को पढ़ने का अवसर मिलेगा।
अगर आप हिंदी साहित्य की दुनिया से जुड़े रहना चाहते हैं तो ‘प्रतिज्ञान’ आपके लिए है। हमें आपका साथ चाहिए और हम निरंतर, हर महीने और भी बेहतर अंक प्रकाशित करते रहेंगे। इस हफर में हमारे साथ जुड़ने के लिए हम और सभी लिखने वाले आपके आभारी हैं।
पहले अंक की प्रशंसा




प्रतिज्ञान – पहला अंक | सितम्बर २०२५

प्रतिज्ञान के पहले अंक के रचनाकारों का परिचय:
कावेरी झा
लखनऊ की २७ वर्षीया गृहिणी कावेरी अपने परिवार, किताबों और बागवानी के शौक के साथ एक शांत जीवन जीती हैं। सुबह की चाय के साथ बालकनी में बैठकर कहानियाँ गढ़ना और मानवीय रिश्तों की बारीक परतों को समझना उन्हें पसंद है। उनकी रचनाओं में रोज़मर्रा के जीवन की सादगी और भावनाओं की गहराई देखने को मिलती है। कावेरी का मानना है कि हर व्यक्ति के जीवन में एक अनकही कहानी होती है, जिसे शब्दों का रूप देना उन्हें सुकून देता है। उनकी लेखनी आपको ऐसी ही छोटी-छोटी, पर दिल को छू लेने वाली कहानियों के संसार में ले जाएगी।
अंकित राज ओझा
छपरा (बिहार) में जन्मे एवं सॉफ्टवेयर अभियंता रहे अंकित राज ओझा आईआईटी रूड़की से पीएचडी हैं एवं उच्चतर शिक्षा विभाग, हरियाणा में अंग्रेज़ी के सहायक प्राध्यापक हैं। अंकित की रचनायें साहित्य अकादमी, आउटलुक, चन्द्रभागा, रटलेज, जॉन्स हॉप्किन्स यूनिवर्सिटी प्रैस आदि से प्रकाशित हैं व आप द हुगली रिव्यु के सम्पादक हैं।
X: @ankit_raj01
आसिफ अंसारी
पटना के युवा आसिफ, अपनी कलम से कहानियों में जान भर देते हैं। पेशे से एक अकाउंटेंट, आसिफ दिन भर संख्याओं की दुनिया में खोए रहते हैं, लेकिन शाम होते ही उनका दिल शब्दों की गलियों में निकल पड़ता है। उन्हें फुर्सत के पल में उर्दू शायरी और ग़ज़लें पढ़ना बेहद पसंद है, जिसकी झलक उनकी कहानियों में साफ दिखती है।
रश्मि शुक्ला ‘सैयाही’
रश्मि शुक्ला, जमशेदपुर में जन्मी और मुंबई में कार्यरत एच आर फ्रीलांसर, साहित्य और सृजनशीलता की साधक हैं। यात्राओं और अनुभवों से प्रेरित उनकी लेखनी में भावनाओं की गहराई झलकती है। उनकी कृतियाँ— “मारिची की डोरियाँ” (हिन्दी) और “Aeonian Zephyrs” (अंग्रेज़ी)— प्रकाशित हो चुकी हैं। उनका जीवन-मंत्र है— “स्वयं बनो और जीवन को पूर्णता से जियो।”
इंस्टाग्राम – @perkyperk_rash
सोनी रमाकांत
सोनी जी ने ह्यूमैनिटीज़ में पीएचडी की है और इंश्योरेंस और रिस्क मैनेजमेंट में मास्टर्स डिग्री हासिल की है। उन्हें पढ़ने और लिखने का बहुत शौक है। वो आम लोगों की ज़िंदगी और उनसे जुड़ी सच्ची कहानियों पर अपने विचार और कहानियाँ लिखना पसंद करती हैं।
इंस्टाग्राम – @suno_dill
डॉ. रेखा रानी
डॉ. रेखा रानी लंबे समय से हिंदी लेखन में सक्रिय हैं। उन्होंने नालंदा ओपन विश्वविद्यालय के लिए अध्ययन-सामग्री तैयार की है। इसके अलावा, उन्होंने मगधी कविताओं का हिंदी रूपांतरण और एक शोध-स्तरीय पुस्तक का अनुवाद भी किया है। भारत सरकार द्वारा आयोजित हिंदी निबंध प्रतियोगिता में उन्हें तृतीय स्थान प्राप्त हुआ है। उनकी कई पुस्तकें व काव्य-संग्रह अमेज़न पर उपलब्ध हैं। वह एक लेखिका, मनोवैज्ञानिक परामर्शदाता और पूर्व प्रोफेसर (मनोविज्ञान) हैं।
इंस्टाग्राम – @rekhasahay8
प्रियांक समग्र जैन
प्रियांक आईआईटी बॉम्बे के आशिंक देसाई सेंटर फॉर पॉलिसी स्टडीज से पीएचडी कर रहे हैं। उनका मानना है कि मानव जीवन की जटिलताओं को अकादमिक विषयों की तुलना में कविताएँ अधिक बेहतर ढंग से दर्शाती हैं।
X: @priyanksj
सुचि
कलाकार और लेखिका सुचि, रंगों से चित्र बनाती हैं और शब्दों से लिखती हैं। उनकी कला और कविताएं दुनिया को जानने, अनुभवों पर विचार करने और ऐसे दृष्टिकोणों को साझा करने का उनका तरीका है जो लोगों को आपस में जोड़ते हैं और उन्हें सोचने पर मजबूर करते हैं।
इंस्टाग्राम – @_artistic_diva_
खामोश चीख – पोएट्री प्रॉम्प्ट में चयनित रचनाकार
- प्रज्ञा शुक्ला
- कुमुद बंसल
- प्रियेश मालवीय
- सोनिका शर्मा
- अनीता कवात्रा
- प्रीति श्रीवास्तव
- नमो एन दीक्षित
- विनोद कोरडे
- कनक अग्रवाल
- संदीप कजाले
- प्रिंस जैन
- वरुण कुमार द्रविड़
- प्रियम मिश्रा