“ये सहनशीलता बस एक मुखौटा है। इतनी देर तक पहन रखा है कि नकाब गल कर चमड़े के पोर से रिसता हुआ तुम बन गया है…”
समकालीन हिंदी साहित्य की अनवरत यात्रा में ‘प्रतिज्ञान’ का यह नौवां अंक (मई २०२६) अपने पाठकों के लिए एक बेहद विचारोत्तेजक और गहरा विमर्श लेकर आया है। इस महीने का आवरण विशेष है ‘मौसम’। लेकिन यहाँ मौसम महज़ कैलेंडर की बदलती ऋतुओं या चिलचिलाती धूप का नाम नहीं है; यहाँ मौसम एक रूपक है, इंसानी फितरत का आईना है, और समाज के बदलते मिज़ाज का मनोवैज्ञानिक दस्तावेज़ है।
यदि आप गंभीर, यथार्थवादी और लीक से हटकर समकालीन हिंदी लेखन को पढ़ने के शौकीन हैं, तो ‘प्रतिज्ञान’ का यह अंक आपके लिए ही है। मई की इस तपिश में, विचारों की इस शीतल मगर तीखी छाँव का हिस्सा बनिए।
आज ही अपनी किंडल प्रति डाउनलोड करें और समकालीन साहित्य के इस अनूठे विमर्श से जुड़ें!
प्रतिज्ञान अंक ९ के रचनाकार
सम्पादक : नितेश मोहन वर्मा
सह-सम्पादक : शिव कुमार शर्मा
अनीता क्वात्रा
अनीता क्वात्रा, एक संवेदनशील रचनाकार, जीवन की कोमल भावनाओं को शब्दों में ढालने का अद्भुत हुनर रखती हैं। पंजाब के पटियाला में जन्मीं अनीता बचपन से ही भाषा, संस्कृति और मानवीय संवेदनाओं की गहराई से जुड़ी रही हैं। विवाह के बाद उन्होंने हरियाणा को अपना घर बनाया, जहाँ वे अपने पंजाब की मिट्टी, बोलियों और परंपराओं को दिल में सहेजे हुए, बच्चों को पंजाबी भाषा सिखाने का निष्ठापूर्ण कार्य भी करती हैं। उनकी शिक्षा भले ही ग्रेजुएशन तक सीमित हो, पर उनकी वास्तविक विद्या उनके अनुभवों, संवेदनाओं और जीवन के उतार–चढ़ाव में निहित है। इसीलिए उनकी रचनाओं में चकाचौंध नहीं बल्कि सच्चाई, आत्मीयता और स्त्री-मन की गहराई से जन्मा एक मार्मिक यथार्थ मिलता है।
गगन शुक्ल ‘दीप’
इनका जन्म पंजाब राज्य के एक गाँव में हुआ था। इन्होंने पंजाब विश्वद्यालय, चंडीगढ़ से ही उच्च शिक्षा ग्रहण की है। यह लगभग २० वर्षों से रुचि के अनुरूप लिख रही हैं। पहली रचना का सृजन २००४ में किया था। अब तक यह ५०० से अधिक रचनाओं का सृजन कर चुकी हैं और इनके अनुसार लेखन एक ज़िम्मेदारी से भरा हुआ रचनात्मक कार्य है। भारत में यह पेशे से हिन्दी अध्यापिका रही हैं। आजकल यह कैनेडा का स्थाई आवास प्राप्त करके वहीं बस चुकी हैं। इनके मनपसंद लेखक मुंशी प्रेमचंद व महादेवी वर्मा हैं, जिनके उपन्यास और काव्य-रचनायें अधिक पसंद हैं। इन्हें स्वयं कविता, कहानी, व्यंग्यात्मक लेख लिखना अधिक पसंद है। यह पंजाबी व हिन्दी भाषाओं में रचनाओं का सृजन करती हैं अब तक इनके 77 के लगभग साँझा काव्य संकलन प्रकाशित हो चुके हैं।
हर्षा बागडे
मध्य प्रदेश की रहने वाली हर्षा एक कुशल गृहिणी हैं, जिन्हें किताबें पढ़ने, लिखने और बागवानी करने का गहरा शौक है। हिंदी और गुजराती दोनों भाषाओं पर समान पकड़ रखने वाली हर्षा जीवन से जुड़े किस्सों, रोजमर्रा की घटनाओं और अपने मन के विचारों को बेहद संजीदगी से कागज़ पर उतारती हैं। उनकी लेखनी का उद्देश्य उन सपनों को पूरा करना है, जिनके लिए वे कुछ करना चाहती थीं और जो अब भी बाकी हैं। वे ऐसा साहित्य रचना चाहती हैं जिसे पूरी दुनिया पढ़ सके, समझ सके और उससे कुछ सीख सके। अपनी रचनाओं के माध्यम से वे आने वाली पीढ़ी को यह संदेश देना चाहती हैं कि एक महिला होना तो आसान है, लेकिन अपने मन के मुताबिक जी पाना बेहद चुनौतीपूर्ण है।
कनक अग्रवाल
कनक एक गृहिणी हैं जो आगरा में निवास करती हैं। वह अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ, जीवन की जटिलताओं को शब्दों के माध्यम से सुलझाने का प्रयास करती हैं। उनका मानना है कि मानव जीवन में प्रेम सर्वोपरि है और यही वह माध्यम है जो सभी विषमताओं और वैमनस्यताओं को समाप्त करने की शक्ति रखता है। इसी कारण, प्रेम उनका पसंदीदा विषय है, जिसे वह अपनी कविताओं के माध्यम से व्यक्त करने का प्रयास करती हैं। वह चाहती हैं कि संसार के सारे विभेद समाप्त हो जाएँ और पूरा संसार प्रेममय हो जाए।
मानसी पांडे
मानसी पांडे एक मल्टीप्रिन्योर (बहु-उद्यमी), कम्युनिकेशन कोच, स्पिरिचुअल लाइफ मेंटर (आध्यात्मिक जीवन मार्गदर्शक) और कहानीकार हैं। उनका दृढ़ विश्वास है कि वास्तविक सफलता की शुरुआत आंतरिक संतुलन और सार्थक मानवीय जुड़ाव से होती है। पिछले दो दशकों में, उन्होंने मीडिया, हॉस्पिटैलिटी, वेलनेस, कोचिंग और अनुभवात्मक शिक्षण के विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक कार्य किया है। इस दौरान उन्होंने लोगों में आत्मविश्वास, भावनात्मक बुद्धिमत्ता और एक वास्तविक व प्रामाणिक उपस्थिति का निर्माण करने में महत्वपूर्ण सहयोग दिया है।
मीनल गुप्ता
मीनल गुप्ता गुजरात की रहने वाली एक ३५ वर्षीय स्वास्थ्य सेवा पेशेवर हैं। उनकी मुख्य रुचियाँ चित्रकला और अकादमिक लेखों के अध्ययन में रही हैं, लेकिन लेखन उनके जीवन में एक नए अनुराग के रूप में उभरा है। वे लेखन को जीवन के लिए एक उपचारात्मक माध्यम मानती हैं। मीनल का यह संकल्प है कि वे अपने शब्दों के माध्यम से पाठकों के दिलों को स्पर्श करें। उनके कुछ लेख पहले ही विभिन्न ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और ई-पुस्तकों में प्रकाशित हो चुके हैं।
नितेश मोहन वर्मा
प्रतिज्ञान प्रकाशन के संस्थापक और प्रधान सम्पादक के तौर पर, आप हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों भाषाओं में कहानियाँ और कविताएँ लिखते हैं। आपका पहला काव्य संग्रह, ‘आई हिअर द डेड’, जंग की त्रासदी पर इक्कीस कविताओं के माध्यम से एक मार्मिक कहानी बुनता है। समकालीन हिंदी साहित्य के रचनाकारों को एक मंच और सम्मान दिलाना आपका प्रमुख संकल्प है।
पारुल शर्मा
पारुल शर्मा मुंबई, भारत में रहने वाली एक लेखिका और कलाकार हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन से विधि में स्नातकोत्तर करने के बाद उन्होंने एक दशक से अधिक समय तक वकालत की, फिर अपनी सृजनात्मक अभिरुचि का सम्मान करते हुए कलाकार और लेखिका बनने का निर्णय लिया। पारुल एक अत्यंत सृजनशील व्यक्तित्व हैं और कविता के साथ-साथ गद्य लेखन भी करती हैं। सोशल मीडिया मंचों पर उनकी रचनात्मक उपस्थिति उल्लेखनीय है। पिछले साल, उन्होने अपनी पहली लघु उपन्यासिका (नोवेला) “Roohi & Khidr, A Search for Love guided by the wisdom of Rumi” प्रकाशित की। उनकी कविताएँ विभिन्न माध्यमों में व्यापक रूप से प्रकाशित हो चुकी हैं। लेखन के अतिरिक्त, वे साहित्य और कला से जुड़ी पहलों को ऑनलाइन तथा ऑफलाइन दोनों माध्यमों में प्रोत्साहित करने हेतु साहित्यिक गतिविधियों में भी महत्वपूर्ण योगदान देती हैं।
पिंकी गिरी
पिंकी जी साहित्य और कला के प्रति गहरा अनुराग रखने वाली एक समर्पित लेखिका हैं, जो गृहणी के रूप में अपने दायित्वों के साथ-साथ रचनात्मकता के संसार में सक्रिय हैं। दिल्ली में जन्मीं और स्नातक की शिक्षा प्राप्त करने वाली पिंकी, वर्तमान में उत्तराखंड के नैनीताल जिले की शांत और प्राकृतिक वादियों में रहती हैं। उनका लेखन, जीवन के सूक्ष्म अनुभवों और साहित्यिक संवेदनाओं का एक सुंदर समन्वय है। पठन और लेखन के प्रति उनका गहन शौक उन्हें कला और साहित्य की दुनिया से जोड़ता है। उनकी विचारशील और आत्मीय रचनाएँ देश के कई प्रतिष्ठित किताबों और समाचार पत्रों में सफलतापूर्वक प्रकाशित हो चुकी हैं।
पिंकी खंडेलवाल
पिंकी खंडेलवाल एक मध्यमवर्गीय परिवार से हैं। उनकी रचनाओं को अनेकों अंतरराष्ट्रीय अखबारों जैसें विजय दर्पण पत्रिका, अमर उजाला, देहरादून पत्रिका, अनुभव पत्रिका, साहित्यनामा इत्यादि पत्रिकाओं में प्रकाशित किया गया है। उन्हें साहित्यिक जगत में विविध सम्मानों से सम्मानित किया गया है। उनकी २०० से अधिक कविताएं साझा संग्रहों में प्रकाशित हैं। उनके द्वारा लिखित पुस्तकें “त्योहारों का महत्व”, “मेरा सपना” इत्यादि हैं।
रश्मि शुक्ला ‘सैयाही’
रश्मि शुक्ला, जमशेदपुर में जन्मी और मुंबई में कार्यरत एच आर फ्रीलांसर, साहित्य और सृजनशीलता की साधक हैं। यात्राओं और अनुभवों से प्रेरित उनकी लेखनी में भावनाओं की गहराई झलकती है। उनकी कृतियाँ “मारिची की डोरियाँ” (हिन्दी) और “Aeonian Zephyrs” (अंग्रेज़ी) प्रकाशित हो चुकी हैं। उनका जीवन-मंत्र है “स्वयं बनो और जीवन को पूर्णता से जियो।”
डॉ. श्वेता अयंगर
डॉ. श्वेता अयंगर SkinSense Medical Aesthetics की संस्थापक हैं। वे एक अनुभवी एस्थेटिक फिजिशियन (Aesthetic Physician) हैं, जिन्हें त्वचा, बाल, बॉडी शेपिंग (शरीर को सुडौल बनाने) और वेलनेस ट्रीटमेंट्स के क्षेत्र में १५ से अधिक वर्षों का व्यापक अनुभव है। वे लोगों को तरोताजा, स्वस्थ और आत्मविश्वासी दिखने में मदद करने के लिए विज्ञान, तकनीक और एक व्यक्तिगत दृष्टिकोण के अनूठे समन्वय के लिए जानी जाती हैं। उनका क्लिनिक उन्नत यूएस एफडीए-अनुमोदित उपचारों और उपकरणों का उपयोग करके प्राकृतिक दिखने वाले परिणामों पर ध्यान केंद्रित करता है। डॉ. श्वेता लोगों को सरल और व्यावहारिक सलाह के साथ शिक्षित करने में विश्वास रखती हैं जो वास्तविक जीवन में आसानी से अपनाई जा सके। अपने काम के माध्यम से, उनका उद्देश्य त्वचा और बालों की देखभाल को समझने में आसान, भरोसेमंद और दीर्घकालिक स्वास्थ्य व आत्मविश्वास पर केंद्रित बनाना है।
सनशाइन सुषमा
सुषमा एक नवोदित कवयित्री हैं, जो छंदों (कविता) के माध्यम से जीवन और भावनाओं की जटिलताओं को तलाश रही हैं। शब्दों और कहानियों के प्रति जुनून के साथ, उनका उद्देश्य लेखन के द्वारा पाठकों से जुड़ना है। यह उनका पहला प्रकाशित कार्य है।
तेजस्विनी अरविन्द नवले
तेजस्विनी एक संवेदनशील लेखिका, कवयित्री और कहानीकार हैं। उन्हें शब्दों के माध्यम से भावनाओं, रिश्तों और जीवन के सूक्ष्म अनुभवों को अभिव्यक्त करना पसंद है। उनकी रचनाओं में प्रेम, आत्मचिंतन, स्त्री मन, सामाजिक यथार्थ और आध्यात्मिक अनुभूतियों की झलक मिलती है। लेखन उनके लिए केवल अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि आत्मसंवाद और आत्मखोज का माध्यम है। वर्तमान में वे कहानियाँ, कविताएँ, गीत और ब्लॉग लेखन में सक्रिय हैं तथा साहित्य और सृजनात्मक लेखन के क्षेत्र में निरंतर सीखने और प्रयोग करने में विश्वास रखती हैं।
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