मातृत्व एक वरदान है। एक ज़िम्मेदारी है। किन्तु इस वरदान, इस ज़िम्मेदारी को हर स्त्री के लिए अनिवार्य किसने बनाया? किस अधिकार से? अगर कोई स्त्री इस वरदान से वंचित रह जाए तो क्या उसके नारीत्व पर सवाल उठाये जाने चाहिए? यदि कोई स्त्री इस ज़िम्मेदारी का निर्वहन न करने का निर्णय ले, तो क्या उसके चरित्र पर सवाल और दोषारोपण करना सही है?
अपनी कोख में एक संतान को शरण देने का फैसला एक स्त्री का अकेले का क्यों नहीं? क्या समाज ने एक बाँझ स्त्री और एक नपुंसक पुरुष को समान दृष्टि से देखा? पत्नी के बाँझ होने पर पति को दूसरे, तीसरे विवाह की छूट, सलाह और अनुमति देने वाले समाज ने क्या एक नपुंसक पति की पत्नी को यही सलाह और स्वतंत्रता दी? एक दंपत्ति के निःसंतान होने पर पहला सवाल स्त्री से क्यों पूछा गया?
ये बस कुछ सवाल हैं। माँ न बन पाना या माँ न बनने का निर्णय लेना – इन दोनों के कई कारण हैं। कुछ निजी, कुछ परिस्थितियों का प्रभाव। इन कारणों, इन सवालों को खंगालने और परखने का हक़ भी सिर्फ एक स्त्री को मिलना चाहिए।
प्रतिज्ञान के इस आठवें अंक के आवरण विशेष “मातृत्व – पूर्णता या बोझ” में हिंदी साहित्य की सात उभरती और प्रतिभाशाली लेखिकाओं ने अपने विचारों, सुझावों और आपके लिए सवालों को कहानियों और कविताओं के रूप में प्रस्तुत किया है। पढ़ें और अपने विचार अवश्य साझा करें।
प्रतिज्ञान अंक ८ के रचनाकार
सम्पादक : नितेश मोहन वर्मा
सह-सम्पादक : शिव कुमार शर्मा
अनीता क्वात्रा
अनीता क्वात्रा, एक संवेदनशील रचनाकार, जीवन की कोमल भावनाओं को शब्दों में ढालने का अद्भुत हुनर रखती हैं। पंजाब के पटियाला में जन्मीं अनीता बचपन से ही भाषा, संस्कृति और मानवीय संवेदनाओं की गहराई से जुड़ी रही हैं। विवाह के बाद उन्होंने हरियाणा को अपना घर बनाया, जहाँ वे अपने पंजाब की मिट्टी, बोलियों और परंपराओं को दिल में सहेजे हुए, बच्चों को पंजाबी भाषा सिखाने का निष्ठापूर्ण कार्य भी करती हैं। उनकी शिक्षा भले ही ग्रेजुएशन तक सीमित हो, पर उनकी वास्तविक विद्या उनके अनुभवों, संवेदनाओं और जीवन के उतार–चढ़ाव में निहित है। इसीलिए उनकी रचनाओं में चकाचौंध नहीं बल्कि सच्चाई, आत्मीयता और स्त्री-मन की गहराई से जन्मा एक मार्मिक यथार्थ मिलता है।
अरुणा महेश जाजू
शब्दों की कीमत समझती हूँ इसीलिए कुछ अनकही बातों को शब्दों में पिरोती हूँ। क्रांति करने के कई जरिए हैं, मुझे कलम पसंद आई। कवि ‘बाई चांस’ नहीं हूँ, कवि ‘फॉर चांस’ हूँ। एक ख्वाब है कि ना रहूँ पर किताबों में जिंदा रहूँ।
गगन शुक्ल ‘दीप’
इनका जन्म पंजाब राज्य के एक गाँव में हुआ था। इन्होंने पंजाब विश्वद्यालय, चंडीगढ़ से ही उच्च शिक्षा ग्रहण की है। यह लगभग २० वर्षों से रुचि के अनुरूप लिख रही हैं। पहली रचना का सृजन २००४ में किया था। अब तक यह ५०० से अधिक रचनाओं का सृजन कर चुकी हैं और इनके अनुसार लेखन एक ज़िम्मेदारी से भरा हुआ रचनात्मक कार्य है। भारत में यह पेशे से हिन्दी अध्यापिका रही हैं। आजकल यह कैनेडा का स्थाई आवास प्राप्त करके वहीं बस चुकी हैं। इनके मनपसंद लेखक मुंशी प्रेमचंद व महादेवी वर्मा हैं, जिनके उपन्यास और काव्य-रचनायें अधिक पसंद हैं। इन्हें स्वयं कविता, कहानी, व्यंग्यात्मक लेख लिखना अधिक पसंद है। यह पंजाबी व हिन्दी भाषाओं में रचनाओं का सृजन करती हैं अब तक इनके 77 के लगभग साँझा काव्य संकलन प्रकाशित हो चुके हैं।
कनक अग्रवाल
कनक एक गृहिणी हैं जो आगरा में निवास करती हैं। वह अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ, जीवन की जटिलताओं को शब्दों के माध्यम से सुलझाने का प्रयास करती हैं। उनका मानना है कि मानव जीवन में प्रेम सर्वोपरि है और यही वह माध्यम है जो सभी विषमताओं और वैमनस्यताओं को समाप्त करने की शक्ति रखता है। इसी कारण, प्रेम उनका पसंदीदा विषय है, जिसे वह अपनी कविताओं के माध्यम से व्यक्त करने का प्रयास करती हैं। वह चाहती हैं कि संसार के सारे विभेद समाप्त हो जाएँ और पूरा संसार प्रेममय हो जाए।
कावेरी झा
लखनऊ की २८ वर्षीया गृहिणी कावेरी अपने परिवार, किताबों और बागवानी के शौक के साथ एक शांत जीवन जीती हैं। सुबह की चाय के साथ बालकनी में बैठकर कहानियाँ गढ़ना और मानवीय रिश्तों की बारीक परतों को समझना उन्हें पसंद है। उनकी रचनाओं में रोज़मर्रा के जीवन की सादगी और भावनाओं की गहराई देखने को मिलती है। कावेरी का मानना है कि हर व्यक्ति के जीवन में एक अनकही कहानी होती है, जिसे शब्दों का रूप देना उन्हें सुकून देता है। उनकी लेखनी आपको ऐसी ही छोटी-छोटी, पर दिल को छू लेने वाली कहानियों के संसार में ले जाएगी।
मीनल गुप्ता
मीनल गुप्ता गुजरात की रहने वाली एक ३५ वर्षीय स्वास्थ्य सेवा पेशेवर हैं। उनकी मुख्य रुचियाँ चित्रकला और अकादमिक लेखों के अध्ययन में रही हैं, लेकिन लेखन उनके जीवन में एक नए अनुराग के रूप में उभरा है। वे लेखन को जीवन के लिए एक उपचारात्मक माध्यम मानती हैं। मीनल का यह संकल्प है कि वे अपने शब्दों के माध्यम से पाठकों के दिलों को स्पर्श करें। उनके कुछ लेख पहले ही विभिन्न ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और ई-पुस्तकों में प्रकाशित हो चुके हैं।
नितेश मोहन वर्मा
प्रतिज्ञान प्रकाशन के संस्थापक और प्रधान सम्पादक के तौर पर, आप हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों भाषाओं में कहानियाँ और कविताएँ लिखते हैं। आपका पहला काव्य संग्रह, ‘आई हिअर द डेड’, जंग की त्रासदी पर इक्कीस कविताओं के माध्यम से एक मार्मिक कहानी बुनता है। समकालीन हिंदी साहित्य के रचनाकारों को एक मंच और सम्मान दिलाना आपका प्रमुख संकल्प है।
पिंकी गिरी
पिंकी जी साहित्य और कला के प्रति गहरा अनुराग रखने वाली एक समर्पित लेखिका हैं, जो गृहणी के रूप में अपने दायित्वों के साथ-साथ रचनात्मकता के संसार में सक्रिय हैं। दिल्ली में जन्मीं और स्नातक की शिक्षा प्राप्त करने वाली पिंकी, वर्तमान में उत्तराखंड के नैनीताल जिले की शांत और प्राकृतिक वादियों में रहती हैं। उनका लेखन, जीवन के सूक्ष्म अनुभवों और साहित्यिक संवेदनाओं का एक सुंदर समन्वय है। पठन और लेखन के प्रति उनका गहन शौक उन्हें कला और साहित्य की दुनिया से जोड़ता है। उनकी विचारशील और आत्मीय रचनाएँ देश के कई प्रतिष्ठित किताबों और समाचार पत्रों में सफलतापूर्वक प्रकाशित हो चुकी हैं।
डॉ. रेखा रानी
डॉ. रेखा रानी लंबे समय से हिंदी लेखन में सक्रिय हैं। उन्होंने नालंदा ओपन विश्वविद्यालय के लिए अध्ययन-सामग्री तैयार की है। इसके अलावा, उन्होंने मगधी कविताओं का हिंदी रूपांतरण और एक शोध-स्तरीय पुस्तक का अनुवाद भी किया है। भारत सरकार द्वारा आयोजित हिंदी निबंध प्रतियोगिता में उन्हें तृतीय स्थान प्राप्त हुआ है। उनकी कई पुस्तकें व काव्य-संग्रह अमेज़न पर उपलब्ध हैं। वह एक लेखिका, मनोवैज्ञानिक परामर्शदाता और पूर्व प्रोफेसर (मनोविज्ञान) हैं।
सचिन कुमार त्रिपाठी
सचिन भू-विज्ञान और इंजीनियरिंग क्षेत्र के एक प्रतिष्ठित विशेषज्ञ हैं। एम.एस.सी. (एप्लाइड जियोलॉजी) शिक्षित सचिन के पास भू-तकनीकी एवं टनल डिजाइन जैसे जटिल विषयों में दो दशकों से अधिक का व्यापक अनुभव है। उनके शोध-पत्र राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं और तकनीकी नवाचारों के लिए उन्हें कई प्रतिष्ठित मंचों पर सम्मानित भी किया गया है। पेशेवर व्यस्तताओं के बीच, साहित्य के प्रति गहरा अनुराग उन्हें निरंतर काव्य सृजन के लिए प्रेरित करता है। वे अपनी रचनाओं के माध्यम से अपने गहन अनुभवों और मौलिक सोच को शब्दों में पिरोने का प्रयास करते हैं। वर्तमान में वे कई वैश्विक संस्थानों के सक्रिय सदस्य के रूप में अपनी सेवाएँ दे रहे हैं।
सारंग भांड
सारंग क्लीन-टेक सेक्टर में काम करने वाले एक उद्यमी हैं। वे सप्ताहंत में लिखने में समय बिताना पसंद करते हैं। वह जापानी कविता रूपों के एक उत्सुक छात्र हैं और ‘सेनर्यू’ लिखना पसंद करते हैं। वह कभी-कभी निबंध और लघु कथाएँ भी लिखते हैं।
शिव कुमार शर्मा
मुंबई निवासी शिव आधुनिक युग के उन विरल रचनाकारों में से हैं जो अपने आईटी पेशेवर जीवन के साथ-साथ एक संवेदनशील कवि और चिंतक की भूमिका निभाते हैं। वे तकनीक और भारतीय परंपरा के बीच एक सजीव सेतु रचते हैं। शिव की लेखनी में रामचरितमानस, संत कवियों के दोहों और मानव अनुभवों की सूक्ष्म संवेदनाएँ सहजता से मिलती हैं। उनका लक्ष्य है कि शब्दों के माध्यम से वे भी आने वाली पीढ़ी के लिए ज्ञान के अनमोल रतन छोड़ जाएँ, ठीक उसी तरह जैसे हमारे पुराने ऋषियों और कवियों ने किया था। आप प्रतिज्ञान प्रकाशन के सह-सम्पादक हैं।
सोनी रमाकांत
सोनी जी ने ह्यूमैनिटीज़ में पीएचडी की है और इंश्योरेंस और रिस्क मैनेजमेंट में मास्टर्स डिग्री हासिल की है। उन्हें पढ़ने और लिखने का बहुत शौक है। वो आम लोगों की ज़िंदगी और उनसे जुड़ी सच्ची कहानियों पर अपने विचार और कहानियाँ लिखना पसंद करती हैं।
सुबोध कुमार सिन्हा
साठ वर्षीय पुरुष, एक निजी संस्थान में कार्यरत, लेखन के साथ अभिनय में भी रुचि, मंच के साथ ही कुछ फिल्म व वेब सीरीज के लिए अभिनय करता रहा हूँ और प्रसार भारती से कविता, लघुकथा, कहानी व आलेख का प्रसारण होता आया है। लेखन दिनचर्या में शामिल है।
सनशाइन सुषमा
सुषमा एक नवोदित कवयित्री हैं, जो छंदों (कविता) के माध्यम से जीवन और भावनाओं की जटिलताओं को तलाश रही हैं। शब्दों और कहानियों के प्रति जुनून के साथ, उनका उद्देश्य लेखन के द्वारा पाठकों से जुड़ना है। यह उनका पहला प्रकाशित कार्य है।
तेजस्विनी अरविन्द नवले
तेजस्विनी एक संवेदनशील लेखिका, कवयित्री और कहानीकार हैं। उन्हें शब्दों के माध्यम से भावनाओं, रिश्तों और जीवन के सूक्ष्म अनुभवों को अभिव्यक्त करना पसंद है। उनकी रचनाओं में प्रेम, आत्मचिंतन, स्त्री मन, सामाजिक यथार्थ और आध्यात्मिक अनुभूतियों की झलक मिलती है। लेखन उनके लिए केवल अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि आत्मसंवाद और आत्मखोज का माध्यम है। वर्तमान में वे कहानियाँ, कविताएँ, गीत और ब्लॉग लेखन में सक्रिय हैं तथा साहित्य और सृजनात्मक लेखन के क्षेत्र में निरंतर सीखने और प्रयोग करने में विश्वास रखती हैं।
इस पुस्तक में व्यक्त विचार लेखकों के अपने हैं। यद्यपि सामग्री का यथासंभव तथ्यात्मक सत्यापन किया गया है, तथापि प्रकाशक किसी भी रूप से इसके लिए उत्तरदायी नहीं है।
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